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Technology (23)

नई दिल्ली(17 जनवरी): जल्द ही आप फीचर फोन से प्वॉइंट ऑफ सेल (पीओएस) की तरह डिजिटल भुगतान कर सकेंगे। केंद्र सरकार सामान्य फीचर फोन से डिजिटल भुगतान की नई तकनीक को बढ़ावा देने के लिए कई कंपनियों से बात कर रही है। 

 

 

 

- ध्वनि तरंग और नियर फील्ड कम्युनिकेशन की तकनीक से सामान्य मोबाइल फोन, स्मार्टफोन और टैबलेट मोबाइल प्वाइंट ऑफ सेल यानी एमपीओएस में बदल जाता है।

 

 

 

- एमपीओएस होने के बाद चार सेंटीमीटर की दूर रखे दो फीचर फोन से भी नगद रहित लेने-देन संभव हो जाता है।

 

 

 

- देसी स्टार्टअप टोनटैग के एप में ध्वनि तरंगों से डिजिटल भुगतान होता है। टोनटैग के संस्थापक कुमार अभिषेक के मुताबिक देश में 20 फीसदी मोबाइल यूजर के पास ही स्मार्टफोन है।

 

 

 

- वहीं बिना इंटरनेट के कोई भी कोई भी मोबाइल एप फीचर फोन पर डाउनलोड करना संभव नहीं है। इसलिए बड़ी आबादी को डिजिटल लेन-देन से जोड़ने के लिए फीचर फोन के लिए कैशलेस तकनीकों की जरूरत है।

 

 

 

- ध्वनि तरंग की तकनीक फीचर और स्मार्टफोन दोनों के लिए होंगी। स्मार्टफोन से लेने-देने के लिए बस एक टच करना होगा। फीचर फोन में एक टोल फ्री नंबर डायल करना होगा फिर इंटरेक्टिव वायस रिस्पांस के दिशा-निर्देश का पालन करना होगा

 

नई दिल्ली(16 जनवरी): अब तक आप यूट्यूब पर वीडियो अपलोड कर पैसे कमाते थे, लेकिन बहुत जल्द आप फेसबुक से भी ऐसा कर सकते हैं।  

 

 

- सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक जल्दी एक ऐसा फीचर लॉन्च करने वाला है जिसकी मदद से वीडियो अपलोड करने वालों की कमाई होगी।

 

 

- रिपोर्ट्स के मुताबिक फेसबुक जल्द  ही ”मिड रोल” एड फॉर्मेट को शुरू करने वाला है। इसके बाद आपके द्वारा अपलोड की गई वीडियो के बीच में एड दिखाई देखा जिससे कमाई होगी।

 

 

- रिकोड नामक वेबसाइट पर दी गई जानकारी के मुताबिक, अगर कोई वीडियो किसी यूजर के द्वारा पब्लिश किया जाता है यानि अपलोड किया जाता है तथा उसे लोगों द्वारा कम से कम 20 सेकेंड देखा जाता है तो 20 सेकेंड के बाद एक एड भी दिखाया जाएगा और उस एड पर मिलने वाली धनराशि को पब्लिशर को दे दिया जाएगा।

 

 

 

- वीडियो से होने वाली कमाई का 55 प्रतिशत हिस्‍सा, अपलोड करने वाले को दे दिया जाएगा, जोकि उतना ही हिस्‍सा है जो यू-ट्यूब द्वारा अपलोड करने वाले को मिलता है। हालांकि, इस बारे में अभी तक फेसबुक की ओर से कुछ भी जानकारी नहीं प्राप्‍त हुई है।

 

नई दिल्ली(5 जनवरी):  BSNL ग्रेजुएट इंजीनियर्स के लिए नौकरी का शानदार मौका दे रहा है। BSNL ने 2510 पदों के लिए आवेदन मांगे हैं।

 

- इन पदों के माध्यम से जूनियर टेलीकॉम ऑपरेटर पदों के लिए भर्ती की जाएगी।

 

- कुल पद: 2510

 

- पद का नाम: जूनियर टेलीकॉम ऑपरेटर

 

- शैक्षणिक योग्‍यता : बीएसएनएल की इस भर्ती में भाग लेने के लिए आवेदक को बीई या बीटेक होना जरुरी है और आवदेक को गेट में पास होना भी बहुत जरुरी है। जो उम्मीदवार गेट पास कर चुके हैं वो उम्मीदवार इस भर्ती में भाग ले सकते हैं

 

 -चयन प्रक्रिया : भर्ती में उम्मीदवारों का चयन आवेदक के लिखित परीक्षा और इंटरव्यू के प्रदर्शन के आधार पर किया जाएगा।

 

 - ऐसे करें अप्लाई: इस भर्ती के लिए सभी उम्मीदवारों को ऑनलाइन ही आवेदन करना होगा। इसके लिए सबसे पहले बीएसएनएल की आधिकारिक वेबसाइट पर जाए और संबंधित लिंक पर क्लिक करें और उसके बाद मांगी गई जानकारी भरते हुए प्रक्रिया को फॉलो करते हुए आवेदन कर दें।

 

 - आवदेन की अंतिम तिथि: 30 जनवरी 2017

 

 

 

 

 

 

 

नई दिल्ली: नोटबंदी के बाद से पूरे देश में हाहाकार मचा हुआ है.

 

 

डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए और इंडिया को कैश फ्री करने के लिए शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मोबाइल ऐप भीम लॉन्च किया है.

 

 डिजिटल लेनदेन के लिए भीम ऐप! मोदी बोले- अब आपका अंगूठा बनेगा आपका बैंक

 

 

 

 

क्या है BHIM APP?

 

BHIM APP का पूरा नाम 'भारत इंटर फेस फॉर मनी' है. यह UIP बेसड पेमेंट सिस्टम पर काम करेगा और इसके जरिए ऑनलाइन पेमेंट आसानी से की जा सकेगी. इस ऐप की खास बात ये है कि यह बिना इंटरनेट के भी काम करेगा.

 

इस ऐप में यूजर्स को बैंक अकाउंट नंबर और IFSC कोड जैसे इंर्फोमेशन की जरूरत नहीं पड़ेगी. भीम को नेशनल पेमेंट कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने डेवलप किया है.

 

 

हिंदी-अंग्रेजी में उपलब्ध, एंड्रॉयड पर कर रहा काम

 

 भीम एप को यूज करने के लिए आपको एंड्रॉयड फोन या आईफोन चाहिए होगा. यह एप गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध है. पिछले कुछ समय में जितने फोन लॉन्च हुए हैं, उन सभी पर ये एप डाएनलोड की जा सकती है.

 

 वहीं, इसके बारे में सरकार की ओर से कुछ गलत फैक्ट्स पेश हुए हैं. उसके मुताबिक, यह एप एंड्रॉयड वर्जन 8 पर चलेगी. लेकिन अभी मार्केट में एंड्रॉयड का वर्जन 7 चल रहा है. इस टेक्नीकल मुद्दे पर कंफ्यूज न हों. इंडिया टुडे ने इस एप को चेक किया है और ये हाल में लॉन्च हुए सभी एंड्रॉयड फोन पर काम कर रही है.

 

 इस एप को यूज करने के लिए आपको बैंक अकाउंट और फोन में इंटरनेट कनेक्शन चाहिए होगा. फिलहाल यह ऐप हिंदी और अंग्रेजी को सपोर्ट करेगा. जल्दी ही क्षेत्रीय भाषाएं भी इसमें जुड़ेंगी.

 

 

 कैसे काम करेगा भीम

 

 - इससे पैसे भेजने के लिए आपको सिर्फ एक बार अपना बैंक अकाउंट नंबर रजिस्टर करना होगा और एक UPI पिनकोड जनरेट करना होगा.

 

 - इसके बाद आपका मोबाइल नंबर ही पेमेंट एड्रेस होगा. हर बार अकाउंट नंबर डालने की जरूरत नहीं होगी.

 

-एप के होम स्क्रीन पर जाकर आपको पैसे भेजने के ऑप्शन को चुनना होगा.

 

- अब रिसीवर का मोबाइल नंबर या आधार नंबर या फिर पेमेंट एड्रेस डालें.

 

- इसके आपको भेजे जाने वाली रकम डालनी होगी.

 

- अब आपका पहले से तय बैंक अकाउंट सामने आ जाएगा.

 

- अब आपको UPI पिन डालना होगा.

 

- QR कोड स्कैन करके भी आप किसी को पेमेंट भेज सकते हैं. इसके लिए आपको सिर्फ QR कोड स्कैन करना होगा.

 

 

 

ये भी जानें :

 

 - किसी भी फोन से USSD कोड *99# डायल कर इस ऐप को ऑपरेट किया जा सकता है. ये बिना इंटरनेट के भी काम करेगा.

 

- 24 घंटे में कम से कम 10,000 रुपये और ज्यादा से ज्यादा 20,000 रुपये तक ट्रांसफर कर सकते हैं.

 

- आप भीम एप से अपने बैंक अकाउंट बैलेंस चेक कर सकते हैं.

 

- इस एप के साथ आप फोन नंबर्स के अलावा कस्टम पेमेंट एड्रेस को भी जोड़ सकते हैं

 

 

 

 

 

 

 

 

 

आज के समय में सुबह का अखबार उठाते ही चोरी, हत्या, डकैती, लूट जैसी घटनाएं हम चाय की चुस्कियों के साथ खुद में समाहित कर रहे हैं। 

 

वयस्कों की बात छोड़िए, बालमन भी इनसे इस तरह प्रभावित हो रहा है कि उन्हें रोज होने वाली ये घटनाएं एडवेंचरस लगने लगी हैं। वे इन खबरों पर ठीक उस तरह ध्यान देते हैं जैसे कम्प्यूटर पर कोई गेम की सीडी लगा दी गई हो।

 

बालमन कच्ची मिट्टी की तरह होता है- जैसे ढाल दो, वैसे ही ढल जाता है। और यह बात बिल्कुल सही है। मगर यह समस्या सिर्फ हमारे देश तक ही सीमित नहीं है।

 

दुनिया के समस्त देशों में, यहां तक कि विकसित देशों में भी बच्चे उम्र से पहले बड़े कर दिए जा रहे हैं।

 

हाथों में तकनीकी यंत्र थमा कर उन्हें छोटी उम्र में ही बड़ा कर दिया जा रहा है, जिससे वे मस्ती करना, खेलना सब भूल गए हैं।

 

तकनीक प्रधान इस युग में, प्रयोगों की इस उठापटक में हम भूल गए हैं कि बालमन प्रयोग होने की वस्तु नहीं है।

 

उनके मस्तिष्क को पिटारे की तरह इस्तेमाल न होने देना मानवता का प्रथम कर्त्तव्य है। वैसे कई शोधों में कहा भी गया है कि बाल मस्तिष्क जितना अच्छा विकास प्राकृतिक रूप से करता है, उतना कृत्रिम रूप से नहीं।

 

इसीलिए अवसाद जैसी बीमारी उम्र से पहले ही यौवन को अपनी जकड़ में ले रही है और हम मानसिक बीमारियों की चपेट में आ जाते हैं।

 

यह कई शोधों में प्रमाणित हो चुका है कि गांवों में, जहां तकनीकी साधनों का प्रयोग इतना उच्च नहीं है और जहां बच्चे प्रकृति की गोद में खेलते हैं, वहां के बच्चों का बौद्धिक स्तर ज्यादा होता है।

 

ये और बात है कि वे शहरी बच्चों की तरह सभी प्रकार की जानकारियों से अवगत नहीं हो पाते हैं, मगर उन्हें सिखाया जाए तो वे शहरी बच्चों से ज्यादा अच्छा रिजल्ट देते है।

 

गांव के बच्चों की मानसिक दृढ़ता और परेशानियों से लड़ने की क्षमता शहरी बच्चों के मुकाबले बेहतर होती है। 

 

बचपन को खुलकर हंसना-खेलना चाहिए, मगर बचपन एक खिलौना बन कर रह गया है। हमें बच्चों को प्राकृतिक परिवेश में पलने और बढ़ने देने की जरूरत है।

आपके लिखे हुए मैटर की ऑडियो फाइल बन जाएं तो होगा ना दिलचस्प। टेक्सट मैटर की ऑडियो फाइल बनाने के बाद आप उसे भविष्‍य में सुनने के लिए सेव कर सकते हैं या फिर अपने ब्लॉग पर भी शेयर कर सकते हैं। 

 

टेक्सट को ऑडियो और ऑडियो को टेक्‍स्ट में बदलने के लिए कई वेबसाइट सर्विस मुहैया कराती है। इस तकनीक पर पिछले कई सालों से काम हो रहा है। बात करते हैं ऐसी ही कुछ वेबसाइटों की जिन पर जाकर आप अपने मैटर को ऑडियो फाइल में कनवर्ट कर सकते हैं।

 

www.spokentext.net

 

स्पोकन टेक्सट डॉट नेट टेक्सट को ऑडियो और ऑडियो को टेक्‍स्ट में कनवर्ट करने की सुविधा देती है। यदि आप इसे यूज करना चाहते हैं तो इसके लिए पहले आपको इस पर अकाउंट बनाना होगा।

 

इस पर जाकर आप अंग्रेजी, फ्रेंच, स्पेनिश और जर्मन में लिखे हुए मैटर को ऑडियो में कनवर्ट कर सकते हैं। इन्हीं चारों भाषाओं की ऑडियो फाइल को आप टेक्सट में भी कनवर्ट करके पीडीएफ, वर्ड और पावर प्वाइंट फाइल बना सकते हैं। इस साइट का ट्रायल फ्री है, इसके बाद की सर्विसेज के लिए आपको शुल्क अदा करनी पड़ती है।

 

www.readthewords.com

 

रीडदवर्डस डॉट कॉम पर आप अपना अकाउंट बनाकर फ्री में टेक्सट मैटर की ऑडियो फाइल बना सकते हैं। रीडदवर्डस डॉट कॉम का इंटरफेस भी काफी आसान है। इस साइट की शुरूआत जनवरी 2008 में उन ‌छात्रों को ध्यान में रखकर की गई थी जो पढ़ नहीं सकते लेकिन ऑडियो को आसानी से सुन सकते हैं।

 

www.imtranslator.com

 

आइएमट्रांसलेटर डॉट काम पर चाइनीज, फ्रेंच, इंग्लिश और जापानी के साथ आप दुनिया की करीब 52 भाषाओं के टेक्सट मैटर की ऑडियो फाइल तैयार कर सकते हैं। आइएमट्रांसलेटर डॉट काम पर आप हिंदी मैटर की भी ऑ‌डियो फाइल बना सकते हैं। इसकी स्‍थापना 1993 में की गई थी लेकिन इसने काम करना शुरू साल 2000 में किया। ये काफी पॉपुलर वेबसाइट है।

 

www.ispeech.org 

 

आइस्पीच डॉट ओआरजी पर जाकर आप टेक्स्ट को पेस्ट कर कर दें, यह सिंगल क्लिक में उसकी ऑडियो फाइल तैयार कर देगा। इसकी सुविधाओं के लिए भी आपको एक नियत कीमत अदा करनी होती है। इसके अलावा आप odiogo.com और www.text2speech.org के जरिए भी टेक्सट मैटर की ऑडियो रिकार्डिंग कर सकते हैं।

 

 

 

 

 

क्या हो अगर कोई कंप्यूटर की तरह आपका दिमाग हैक हो जाये। यकीन नहीं होता ना। लेकीन विज्ञान के इसयुगामेसबा कुछ संभव है। हाल ही में कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय में हुए एक शोधा में इस बात का प्रयोग किया गया है कि कंप्यूटर की तरह इंसानी दिमाग को भी हैक किया जा सकता है।

 

 

हैकिंग का प्रयोग साइबर दुनिया में किया जाता है। हैकिंग का अर्थ है बिना अनुमति के किसी संस्थान या व्यक्ति के कंप्यूटर से डाटा आदि को चुराना।

 

अभी तक तो यह हैकिंग कंप्यूटर तक ही सीमित था। लेकिन, यह इंसानी दिमाग के साथ भी हो सकता है। वैज्ञानिकों ने हाल में एक प्रयोग किया है, जिसके तहत वे किसी भी व्यक्ति के मस्तिष्क को हैक कर सकते हैं।

 

यह प्रयोग कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, ऑक्सफोर्ड विश्वैविद्यालय और जेनेवा विश्वाविद्यालय के शोधकर्ताओं ने किया है। उनका कहना है कि इस प्रक्रिया के तहत किसी भी व्यक्ति से संवेदनशील जानकारियां हासिल की जा सकती है।

 

यहां तक कि उनका पिन नंबर और बैंक की तमाम जानकारियां भी इकट्ठा की जा सकती हैं। अपने इस प्रयोग के लिए उन्होंने आसानी से मिलने वाले गेम्स कंट्रोलर की मदद ली, जिसकी कीमत 299 डॉलर के आसपास है।

 

 

यह यूर्जस को कंप्यूटर से बातचीत करने में मदद करता है और अकसर गेम्स को नियंत्रित करने के काम में इस्तेमाल आता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस तकनीक की मदद से किसी भी अपराधी से पूछताछ करने में एक हद तक आसानी हो सकती है।

 

 

 

 

वित्त वर्ष 2013-14 के केंद्रीय बजट में ब्रॉडबैंड सेवाओं पर सर्विस टैक्स खत्म होने का ऐलान हो सकता है, जिससे आप सस्ते इंटरनेट का इस्तेमाल कर सकते हैं।

 

ब्रॉडबैंड और इंटरनेट सेवाएं फिलहाल सर्विस टैक्स के दायरे में आती हैं। इस तरह से आने वाले समय में इंटरनेट आपके पॉकेट होगा इसमें कोई शक नहीं है!

 

डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकॉम (डॉट) के सूत्रों के मुताबिक मंत्रालय की तरफ से इस संबंध में वित्त मंत्रालय को सिफारिश भेज दी गई है और  केंद्रीय बजट में ब्रॉडबैंड सेवाओं पर सर्विस टैक्स खत्म होने की उम्मीद है।

 

खबरों के मुताबिक इंटरनेट सेवाओं के विस्तार के लिए मंत्रालय ने वर्ष 2017 तक 17.5 करोड़ ब्रॉडबैंड ग्राहकों का लक्ष्य तय किया है लेकिन इंटरनेट सेवा महंगी पडऩे के चलते यह लक्ष्य पूरा होना मुश्किल है।

 

 

फिलहाल इंटरनेट सेवाओं को किफायती बनाने के मकसद से सर्विस टैक्स खत्म करने की सिफारिश भेजी गई है।

वाशिंग्टन।। संचार क्रांति के युग में अब नित नए नए अविष्कार और चीजें सामने आ रही हैं। इंटरनेट फ्रेंडली लोगों के लिए अब पासवर्ड याद रखने की झंझट समाप्त होने वाली है। आने वाले वक्त में आपको पासवर्ड याद रखने और बार-बार उन्हें टाइप करने के झंझट से आजादी मिल जाएगी। 

 

कहा जा रहा है कि आने वाले समय में आपको बस सोचना भर होगा और पासवर्ड खुद आकर एक्सेप्ट कर लिया जाएगा।

 

यह सब मुमकिन होगा एक नए वायरलेस हेडसेट के जरिए जिसे रिसर्चर डिवेलप कर चुके हैं। यह डिवाइस बनाई है कैलिफॉर्निया यूनिवर्सिटी के बर्कले स्कूल ऑफ इंफर्मेशन के रिसर्चरों ने। इसकी खासियत यही है कि इसमें पासवर्ड की जगह ब्रेनवेव से प्रमाणिकता पूछी जाती है।

 

इसमें लगी बायो सेंसर टेक्नॉलजी ब्रेनवेव को माप सकती है। इसी के दम पर रिसर्चर पासवर्ड की जगह श्पासथॉट्सश् को हकीकत बना रहे हैं।

 

वेबसाइट मेशेबल के मुताबिक, 100 डॉलर वाला यह हेडसेट वायरलेस है और ब्लूटूथ के जरिए कंप्यूटर से कनेक्ट होता है।

 

डिवाइस में लगे सेंसर यूजर के माथे के संपर्क में होते हैं और इससे वह दिमाग के इलेक्ट्रॉइनसेफलोग्राम (ईईजी) सिग्नल उपलब्ध कराता है। 

 

न्यूरोस्काई माइंडसेट दिखने में किसी आम ब्लूटूथ डिवाइस की तरह है पर काम एकदम हटकर करता है। गजब की बात तो यह है कि आपके किसी दूसरे के दिमाग के वेव्स को कंप्यूटर एक्सेप्ट नहीं करेगा क्योंकि हर किसी के ब्रेन वेव्स अलग होते हैं।

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