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World (24)

ढाका। बांग्लादेश की एक अदालत ने बुधवार को दो पूर्व मंत्रियों समेत 19 लोगों को मृत्युदंड और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान को 2004 ग्रेनेड विस्फोट में उसकी भूमिका के लिए उम्रकैद की सजा सुनाई है। ग्रेनेड विस्फोट में 24 लोगों की मौत हुई थी और 500 से ज्यादा घायल हुए थे। यह फैसला राजधानी में कड़ी सुरक्षा के बीच सुनाया गया और इसके खिलाफ दो महीने के भीतर अपील की जा सकती है।

वर्ष 2004 में यह हमला पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की रैली को निशाना बनाकर किया गया था, जो उस वक्त विपक्ष की नेता थीं। 

बीडीन्यूज 24 डॉट कॉम की खबर के मुताबिक, पूर्व गृहराज्य मंत्री लुत्फोज्जमान बाबर और पूर्व शिक्षा उपमंत्री अब्दुस सलाम पिंटू समेत 19 लोगों को बुधवार को मृत्युदंड की सजा सुनाई गई।

खालिदा के बेटे तारिक रहमान और उनके पूर्व राजनीतिक सचिव हैरिस चौधरी समेत 19 को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। तारिक विपक्षी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष हैं।

इसके अलावा 11 अन्य लोगों को भी जेल की सजा सुनाई गई है। 

कुआलालंपुर। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से जब शनिवार को यह पूछा गया कि अगर वह सरकार में होते तो नोटबंदी को किस तरीके से लागू करते, इसके जवाब में उन्होंने सभी को चकित कर दिया।राहुल ने अपने जवाब में कहा, 'अगर मैं प्रधानमंत्री होता और किसी ने मुझे वह फाइल दी होती, जिस पर नोटबंदी लिखा होता तो मैं उसे कूड़े में डाल देता।' मलेशिया में भारतीय प्रवासियों के साथ बातचीत के दौरान गांधी ने कहा, 'खिड़की से बाहर कूड़े में फेंक देता। मुझे लगता है कि नोटबंदी के साथ यही होना चाहिए था।'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आठ नवंबर 2016 को 500 और 1000 रुपये के नोटों को चलन से बाहर करने की घोषणा की थी।

कांग्रेस पार्टी और अन्य विपक्षी दलों ने प्रधानमंत्री के नोटबंदी के कदम की आलोचना की थी और कहा था कि इसने भारतीय अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान पहुंचाया है

कोलंबो। श्रीलंका में दो समूहों के बीच लगातार हिंसा के बाद 10 दिनों के लिए आपातकाल लगा दिया गया है। बौद्ध और मुस्लिम समुदाय के बीच तनाव के चलते श्रीलंका के हालात काफी बिगड़ गये थे। शुरुआती रिपोर्टों में बताया गया है कि एक कैबिनेट नोट के बाद आपातकाल लगाने की घोषणा की गयी।रिपोर्टों में बताया गया है कि एक बौद्ध व्यक्ति की हत्या के बाद मुस्लिम समुदाय के लोगों के उद्योग-धंधों में तोड़फोड़ की गयी थी जिसके बाद गत कैंडी जिले में हिंसा भड़क गयी थी। प्रशासन ने इससे पहले कुछ जिलों में कर्फ्यू भी लगाया था लेकिन उससे हिंसा नहीं थमी।गौरतलब है कि इस समय भारतीय क्रिकेट टीम मैच खेलने के लिए कोलंबो में ही है। इस बीच त्रिपक्षीय श्रृंखला खेलने आये खिलाड़ियों की सुरक्षा बढ़ा दी गयी है।श्रींलका के कैंडी जिले में बौद्ध समुदाय और अल्पसंख्यक मुसलमानों के बीच भड़की हिंसा के बाद देश में 10 दिनों के लिए आपातकाल की स्थिति घोषित कर दी गई। हिंसक झड़पों में दो लोगों की मौत हो गई थी। कल हिंसा भड़कने के बाद पुलिस ने थेलदेनिया इलाके में कर्फ्यू लगा दिया था। सामाजिक सशक्तिकरण मंत्री एसबी दिसानायके ने बताया कि देश के कुछ हिं‍सों में हिंसा भड़कने के बाद राष्ट्रपुपति मैत्रीपाला सिरीसेना और उनके मंत्रिमंडल ने आज 10 दिनों के लिए आपातकाल की स्थिति घोषित करने का फैसला किया। राष्ट्रपति सचिवालय में मंत्रिमंडल की बैठक के बाद उन्होंने बाहर मौजूद संवाददाताओं को बताया कि इस संबंध में जल्द एक गजट अधिसूचना जारी की जाएगी। डेली मिरर ने उनके हवाले से कहा, “ आरोप लग रहे हैं कि इन तनावपूर्ण स्थितियों के प्रभाव को कम करने के लिए कानून लागू नहीं किया जा रहा है। अब, पुलिस और सैन्य कर्मियों को सुरक्षा बढ़ाने के लिए संबंधित स्थानों पर तैनात कर दिया गया है।” दिसानायके ने कहा कि राष्ट्रपति10 दिन बाद फैसला करेंगे कि आपातकाल की स्थिति को आगे बढ़ाना है या नहीं। कैंडी जिले के थेलडेनिया और पालेकेल इलाके में आज फिर से कर्फ्यू लगाया गया और भारी हथियारों से लैस विशेष कार्यबल के पुलिस कमांडो की तैनाती की गई है। 

नई दिल्ली :  

लगातार चल रही तनातनी के बीच उत्तर कोरिया, अमेरिका के साथ बातचीत करने को तैयार हो गया है।

दक्षिण कोरियाई मीडिया के मुताबिक उत्तर कोरिया अमेरिका के साथ बातचीत करने को तैयार हो गया है।

राष्ट्रपति कार्यालय के हवाले से दक्षिण कोरिया की मीडिया ने कहा है कि उत्तर कोरिया, अमेरिका के साथ बातचीत करने के लिए तैयार है।

गौरतलब है कि पिछले कुछ महीनों के दौरान उत्तर कोरिया और अमेरिका के बीच तनाव बेहद बढ़ चुका है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जहां संयुक्त राष्ट्र में सार्वजनिक तौर पर उत्तर कोरियाई तानाशाह किम जोंग उन को सबक सिखाने की चेतावनी दे चुके हैं वहीं उत्तर कोरिया ने बदले में अमेरिका पर परमाणु हमले की धमकी दी है।

अमेरिका उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम के खिलाफ है। हालांकि कड़े प्रतिबंधों के बावजूद कोरिया लगातार ऐसे परीक्षण करता रहा है, जिसके जवाब में उत्तर कोरिया पर कई तरह के प्रतिबंध लगा चुका है।

उत्तर कोरिया ने ऐसे समय में अमेरिका के साथ बातचीत की इच्छा जाहिर की है जब हाल ही में उत्तर कोरियाई सैन्य जनरल की अगुआई में उत्तर कोरिया का एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल विंटर ओलिंपिक के समापन समारोह में शामिल होने के लिए दक्षिण कोरिया पहुंचा है।

वहीं अमेरिका ने भी विंटर ओलिंपिक्स के समापन समारोह में डॉनल्ड ट्रंप की बेटी और सलाहकार इवांका ट्रंप के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल भेजा है।

हालांकि दोनों देशों के बीच बातचीत की खबर ऐसे समय में सामने आई है जब उत्तर कोरिया ने अमेरिका पर गुप्त तरीके से प्योंगयांग के खिलाफ सैन्य हमले से पहले बड़े पैमाने पर साइबर युद्ध की तैयारी करने का आरोप लगाया है।

समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी (केसीएनए) और सरकारी दैनिक अखबार 'रोडोंग सिनमुन' ने कहा कि अमेरिका की विदेश नीति की पत्रिका ने 15 फरवरी को एक अंक में खुलासा किया था कि वाशिंगटन कोरियाई प्रायद्वीप पर ध्यान केंद्रित करने के लिए अपनी खुफिया क्षमताओं का विस्तार कर रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने बताया कि सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी (सीआईए) की तरह अमेरिका की एजेंसियां हमले के लिए तैयार हैं और इसके लिए कई अरबों डॉलर का निवेश और कई विशेषज्ञों को प्रशिक्षित किया गया है।

'केसीएनए' के अनुसार, 'एनबीसी', 'ब्लूमबर्ग न्यूज' और 'वाशिंगटन पोस्ट' जैसे अमेरिकी मीडिया आउटलेट उत्तर कोरिया से 'साइबर आतंकवाद' और धमकियों के बारे में बात कर रहे हैं, जिसका मतलब है कि प्योंगयांग के खिलाफ अमेरिकी युद्ध की पहल व्यावहारिक कार्यान्वयन के चरण में पहुंच गई है।'

'केसीएनए' ने कहा, अमेरिका दक्षिण कोरिया के साथ युद्ध के अभ्यास के लिए बड़ी संख्या में साइबर युद्ध विशेषज्ञों को भेज रहा है

यूरोप के खूबसूरत देशों में से एक आइसलैंड में जुर्म नाम की चीज नहीं है। कम से कम आज के हालात को देखकर तो यही कहा जा सकता है। आलम यह है कि देश के अधिकांश पुलिस अधिकारियों के पास भी बंदूक नहीं रहती है।

आइसलैंड एक शांतिप्रिय देश है जिसकी न तो आर्मी है और न ही नेवी। पुलिस ने साल 2013 में जब आइसलैंड में एक व्यक्ति को गोली मार दी थी, तो यह अखबारों की सुर्खियां बन गई थी। इस देश के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ था, जब पुलिस ने आग्नेयास्त्रों का इस्तेमाल कर किसी की हत्या की थी। आइसलैंड में करीब तीन लाख लोग रहते हैं।

हालांकि, देश की एक तिहाई आबादी के पास हथियार हैं। यह दुनिया का 15वां ऐसा देश है, जहां प्रति व्यक्ति के लिहाज से सबसे ज्यादा हथियार हैं। मगर, इसके बाद भी अपराधिक घटनाएं यहां कम ही देखने को मिलती हैं।

ब्रिटेन

हालांकि, हाल के दिनों में ब्रिटेन में अपराधिक घटनाओं की संख्या में इजाफा हुआ है। मगर, फिर भी यहां अपराध काफी कम हैं। लोग पुलिस तक आसानी से पहुंच हासिल कर सकते हैं। यहां 19वीं शताब्दी के बाद से पैट्रोलिंग करने वाले ब्रिटिश अधिकारी स्वयं को नागरिकों के संरक्षक मानते हैं, जिन्हें आसानी से लोगों की मदद के लिए सुलभ होना चाहिए।

पुलिस और संदिग्ध अपराधियों के बीच घातक संघर्षों की बहुत कम घटनाएं हैं। साल 2004 के सर्वे में ब्रिटेन के पुलिस फेडरेशन के 82 प्रतिशत सदस्यों ने कहा कि वे नियमित रूप से ड्यूटी के दौरान हथियार लेकर नहीं चलना चाहते हैं। करीब एक तिहाई ब्रिटिश पुलिस अधिकारियों ने ड्यूटी पर रहने के दौरान अपने जीवन पर खतरा बताया, लेकिन फिर भी हथियारों को लेकर चलने का विरोध किया।

 

न्यूजीलैंड

ऑकलैंड टेक्निकल यूनिवर्सिटी के सीनियर क्रिमिनोलॉजी लेक्चरर जॉन बटल ने एक निबंध में कहा कि वास्तव में पुलिस अधिकारियों के लिए हथियार लेकर चलना सुरक्षित नहीं है। उन्होंने 2010 में प्रकाशित एक पत्र में लिखा था कि न्यूजीलैंड में एक पुलिस अधिकारी के मुकाबले एक किसान ज्यादा खतरनाक है। पुलिस को हथियार देने का मतलब है कि अपराधियों में भी हथियारों की दौड़ शुरू हो जाएगी और इससे होने वाली मौतों की संख्या बढ़ेगी। सिडनी स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के एसोसिएट प्रोफेसर फिलिप एल्फर ने कहा कि देशभर में केवल एक दर्जन वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को ही बंदूक दी गई है।

नॉर्वे

इस स्कैंडिनेवियाई देश में हत्याएं बहुत दुर्लभ ही होती हैं। इस देश में भी पुलिस अधिकारी बंदूक लेकर नहीं चलते हैं। मगर, साल 2011 में नॉर्वे एक त्रासदी ने यह साबित कर दिया था कि पुलिस अधिकारियों के निहत्थे घूमने से क्या खतरा हो सकता है। एंडर्स बेहरिंग ब्रेविक ने एक ग्रीष्मकालीन शिविर पर हमला कर 77 लोगों की जान ले ली थी। बहुत से लोगों ने इस भयावह हत्याकांड के लिए पुलिस की देर से प्रतिक्रिया करने को दोषी ठहराया था। हालांकि, अब तक निहत्थे पुलिस अधिकारियों की परंपरा आतंकवाद के डर से भी मजबूत साबित हुई है।

 

काठमांडू। सीपीएन-यूएमएल के अध्यक्ष के.पी. ओली गुरुवार को नेपाल के 41वें प्रधानमंत्री नियुक्त किए गए। राष्ट्रपति बिद्या देवी भंडारी ने ओली को नेपाल के नए प्रधानमंत्री के रूप में नियुक्त किया। ओली की कम्युनिस्ट पार्टी ने संसद में बहुमत के करीब सीटें जीती हैं और इसे सरकार गठित करने के लिए नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी केंद्र) का समर्थन भी प्राप्त है।

इससे पहले निर्वतमान प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा ने अपना इस्तीफा सौंप दिया। ओली द्वारा अपनी पार्टी सीपीएन-यूएमएल और नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी केंद्र) से एक छोटा कैबिनेट गठित किए जाने की संभावना है। सीपीएन-यूएमएल और नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी केंद्र) का जल्द ही विलय होने वाला है। ओली शाम को शपथ ग्रहण करेंगे।

राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से कहा गया कि सुबह माओवादी केंद्र के अध्यक्ष पुष्प कमल दहल 'प्रचंड ' के साथ ओली ने राष्ट्रपति बिद्या से मुलाकात की और बहुमत के आधार पर सरकार बनाने का दावा पेश किया। 

नई दिल्ली(30 जनवरी):अमेरिका से बातचीत के लिए तैयार की गई लिस्ट में चीन ने भारत को भी जगह दी है। दरअसल, चीन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप प्रशासन के लिए 6 अहम मुद्दों की सूची तैयार की है।

 

इस सूची में अमेरिका की भारत को हथियारों की बिक्री, चीन-भारत सीमा मुद्दा और तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा भी शामिल है।

 

अमेरिकी राष्ट्रपति के वरिष्ठ सलाहकार माइकल पिल्सबरी ने एक अंग्रेजी अखबार को बताया कि   ट्रंप के शासन के दौरान अमेरिका-चीन के रिश्ते पर भारत की भी नजरें रहेंगी।

 

चीनी मामलों के विशेषज्ञ पिल्सबरी ने बताया कि चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग के 6 अहम मुद्दों की सूची हमें वरिष्ठ चीनी अधिकारियों द्वारा बताई गई है।

 

उन्होंने कहा, 'चीन ने कभी भी खुले तौर पर अमेरिका से भारत द्वारा हथियारों की खरीद का विरोध नहीं किया है। लेकिन अब चीन इस मुद्दे को उठाने की बात कर रहा है और यह अहम बात है। इसके अलावा दक्षिण कोरिया का मुद्दा

 

भी चीनी सूची में शामिल है।'पिल्सबरी ने बताया कि चीनी सूची में 'वन चाइना पॉलिसी' और ताइवान भी शामिल है। तिब्बत के निर्वासित धर्मगुरु दलाई लामा से अमेरिकी प्रशासन को नहीं मिलने की नसीहत दी गई है।

 

चीन ने दक्षिण कोरिया में अमेरिका द्वारा THAAD (टर्मिनल हाई ऐल्टिट्यूड एरिया डिफेंस) मिसाइल और रेडार सिस्टम तैनात करने की सहमति पर भी चिंता जताई है।

 

उन्होंने कहा कि दरअसल, चीन यह कभी नहीं चाहेगा कि अमेरिका उसकी इंटरकांटिनेंटल बलिस्टिक मिसाइल (ICBM) क्षमता को खत्म करने के लिए कदम उठाए। चीन के ये मिसाइल अमेरिका तक मार करने की क्षमता रखते हैं।

नई दिल्ली ( 27 जनवरी ): पाकिस्तान का बिना लिए भारत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने उस पर जमकर हमला बोला। अन्य देशों के खिलाफ आतंकवाद प्रायोजित करने के लिए धर्म के इस्तेमाल के कुछ देशों के प्रयासों की निंदा की और इस समस्या से निपटने के लिए ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाने का संकल्प लिया है।

 

गुरुवार को भारत-यूएई के साझा बयान में बताया गया कि दोनों पक्षों ने घृणा फैलाने और आतंकवादी मंसूबों को अंजाम देने के लिए समूहों और देशों द्वारा चरमपंथ और धर्म का दुरुपयोग करने से निपटने के प्रयासों का समन्वय तरीके से मुकाबला करने पर सहमति जताई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अबु धाबी के शहजादे शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने बुधवार को द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर व्यापक वार्ता की थी।

 

इसके बाद दोनों देशों ने एक व्यापक रणनीतिक भागीदारी समझौते और रक्षा, सुरक्षा, व्यापार और ऊर्जा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में एक दर्जन से ज्यादा समझौतों पर हस्ताक्षर किए थे। आतंकवाद निरोध, सूचना साझा करने और क्षमता निर्माण में बढ़ते द्विपक्षीय सहयोग पर संतोष जताते हुए दोनों पक्षों ने विश्वास जताया कि ये प्रयास क्षेत्रीय और वैश्विक शांति और सुरक्षा में योगदान देंगे।

 

भारतीय पक्ष ने जनवरी 2016 में पठानकोट में वायु सेना के ठिकाने और सितंबर 2016 में उड़ी में आर्मी कैंप पर आतंकी हमले के बाद यूएई द्वारा दिखाई गई एकजुटता की काफी सराहना की। वक्तव्य में कहा गया कि मोदी और अल नाहयान ने काबुल और कंधार में 10 जनवरी को हुए आतंकवादी हमलों की जोरदार निंदा की और दोषियों को न्याय के दायरे में लाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

 

 मोदी ने इन हमलों में यूएई और अफगानिस्तान के नागरिकों की हुई मौत पर अपनी तरफ से शोक प्रकट किया और हमलों में घायल यूएई के राजनयिकों के जल्द ठीक होने की कामना की। दोनों पक्षों ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के प्रासंगिक सिद्धांतों और उद्देश्यों के अनुसार आतंकवादी नेटवर्कों, उनके वित्तपोषण और गतिविधियों को बाधित करने के प्रयासों के महत्व पर गौर किया।

 

 

नई दिल्ली (24 जनवरी): बीते साल दीपावली पर चीनी पटाखों और अन्य उत्पादों के बहिष्कार के बाद चीन ने भारत में व्यापार और व्यवसाय की रणनीति में बदलाव किया है। चीन अब ‘मेक इन इंडिया’ प्रोग्राम के तहत भारत में ही उत्पादन और निर्माण शुरू करेगा। यहां विभिन्न तरह के प्रोजेक्ट शुरू करने के लिए उत्तर प्रदेश को प्रमुखता दी गई है। चीन आने वाले वर्षों में उत्तर प्रदेश में करीब 50,000 करोड़ रुपये निवेश करने की तैयारी में है। इसके लिए दुबई की बैंकिंग कंपनी इलीसियम कैपिटल पार्टनर को जिम्मेदारी सौंपी गई है। आने वाले समय में कानपुर और बनारस के लिए कुछ प्रोजेक्टों की घोषणा हो सकती है।

 

भारत में स्मार्ट सिटी, मेक इन इंडिया, स्टार्टअप इंडिया जैसी योजनाएं व्यापक पैमाने पर शुरू होने वाली हैं। इनमें निवेश की भारी गुंजाइश है। चीन यहां टेक्नोलॉजी, मीडिया, इंफ्रास्ट्रक्चर, हेल्थ केयर और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में निवेश करना चाहता है। इलीसियम के फाउंडिंग पार्टनर एवं हेड ऑफ कारपोरेट एडवाइज उपमन्यु मिश्रा, इलीसियम के चेयरमैन रिक पुडनर व चीन सरकार के अधिकारी बीते चार माह में केंद्र और राज्य सरकार के एक दर्जन से अधिक विभागों के मंत्रियों से मुलाकात कर चुके हैं। हर स्तर की मीटिंग सकारात्मक रही है।

 

बीते रोज लखनऊ में राज्य सरकार के एक मंत्री के साथ कंपनी के अधिकारियों की मीटिंग हुई। माना जा रहा है अप्रैल तक प्रदेश में किसी बड़े प्रोजेक्ट की घोषणा हो सकती है। चीन सरकार की ओर से भारत में निवेश का यह पहला आधिकारिक मौका है।

 

 

नई दिल्ली: पाकिस्तान के पूर्व सेना प्रमुख जनरल (सेवानिवृत्त) राहील शरीफ ने आज कहा कि कश्मीर विभाजन का एक ‘अपूर्ण एजेंडा’ है और लंबे समय से चले आ रहे इस मुद्दे का हल होने पर ही क्षेत्र में स्थिति सामान्य होगी।

 

राहील ने विश्व आर्थिक मंच से इतर यहां ‘पाकिस्तान ब्रेकफास्ट’ सत्र में कहा, ‘पाकिस्तान को शांति की जरूरत है लेकिन कश्मीर मूल मुद्दा है जिसका हल पहले करना होगा।’ यह पूछे जाने पर कि क्या कश्मीर विवाद के हल के बिना दक्षिण एशिया में शांति एवं आर्थिक समृद्धि हासिल की जा सकती है, उन्होंने कहा, ‘‘आगे कैसे बढ़ा जाए, यह स्पष्ट करने के लिए तीन शब्द हैं और वे हैं कश्मीर, कश्मीर एवं कश्मीर।’

 

 

 

द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार राहील ने कश्मीर को 1947 के विभाजन का ‘अपूर्ण एजेंडा’ बताते हुए कहा कि लंबे समय से चले आ रहे कश्मीर मुद्दे का हल होने पर ही क्षेत्र में स्थिति सामान्य होगी। उन्होंने जोर दिया कि मुद्दे का हल कश्मीर के लोगों की आकांक्षाओं एवं दक्षिण एशिया में स्थायी शांति हासिल करने से संबंधित संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों के अनुरूप ही हो सकता है। राहील ने एक दूसरे सवाल के जवाब में कहा कि पाकिस्तानी में हक्कानी नेटवर्क की मौजूदगी को लेकर बस फिकरेबाजी हो रही हैं।

 

 

 

उन्होंने कहा, ‘पाकिस्तान में और पनाहगाह नहीं हैं और इन आतंकी नेटवर्क एवं उनके प्रशिक्षण शिविरों का पाकिस्तान से खात्मा कर दिया गया है।’ पूर्व सेना प्रमुख ने कहा कि पाकिस्तान अफगानिस्तान के साथ शांति के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है लेकिन ‘अफगानिस्तान में आतंकियों के कई ठिकाने हैं और हमने कई बार (अफगानिस्तान सरकार के साथ) उनकी जगहों की जानकारी साझा की है।

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