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Bihar (2)

बिहार के मंत्री के घर में हुई शराब की दावत.

बिहार के मंत्री के घर में हुई शराब की दावत.

जहानाबाद। क्या शराबबंदी को लेकर नीतीश की सारी कोशिशें धराशाही हो गई है। क्या नीत ...

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Madhay Pradesh (28)

रीबा: त्योथर के जाने माने कांग्रेसी नेता कौशलेश द्विवेदी म.प्र.कांग्रेस कमेटी के सचिव बने.समर्थको मे उत्साह

रीबा: त्योथर के जाने माने कांग्रेसी नेता कौशलेश द्विवेदी म.प्र.कांग्रेस कमेटी के सचिव बने.समर्थको मे उत्साह

(त्योंथर,रीबा) आखिरकार राहुल गांधी के त्योंथर आगवन के बाद बिंध्य छेत्र के सफेद श ...

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Other State (1)

दिल्ली से कोलकाता तक टीएमसी का प्रोटेस्ट

दिल्ली से कोलकाता तक टीएमसी का प्रोटेस्ट

नई दिल्ली : नोटबंदी पर केंद्र सरकार को घेरने में जुटी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्र ...

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लख्ननऊ/उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शारदीय नवरात्र में गोरखनाथ मंदिर के शक्ति मंदिर में कलश स्थापना करेंगे। योगी 9 दिन व्रत रखने के बाद मां दुर्गा की पूजा के पारम्परिक अनुष्ठान को श्रद्धा के साथ पूरा करेंगे। वहीं गोरखनाथ मंदिर प्रबंधन ने 10 अक्तूबर से शुरु हो रहे नवरात्रों के मद्देनजर अभी से तैयारियां शुरु कर दी हैं। नवरात्र की पूर्व संध्या से विजयादशमी तक योगी आदित्यनाथ 7 दिन गोरखनाथ मंदिर में ही प्रवास करेंगे, फिलहाल सीएम के गोरखपुर दौरे का प्रोटोकॉल आना अभी बाकी है।सीएम योगी नवरात्र के दौरान 9 दिन व्रत रखेंगे और फल,गाय के दूधका सेवन करेंगे। योगी 9 अक्तूबर की रात ही गोरखनाथ मंदिर आ जाएंगे। 10 अक्तूबर को शाम 5 बजे मंदिर में कलश यात्रा निकाली जाएगी। योगी की अगुवाई में मंदिर के प्रधान पुजारी योगी कमलनाथ समेत गोरखनाथ मंदिर परिवार के सभी पुजारी, महंत, वेद पाठी बालक आदि शामिल होंगे। वेद के मांगलिक मंत्रों के उच्चारण के बीच निकाली गई यह शोभा यात्रा मुख्य मंदिर परिसर से निकलकर भीम सरोवर तक जाएगी। यहां कलश भरने के बाद शक्ति मंदिर में कलश यात्रा की स्थापना कर पूजा अर्चना की जाएगी।सीएम योगी गुरुवार की सुबह लखनऊ के लिए प्रस्थान करेंगे। वहीं दूसरी तरफ योगी की अनुपस्थिति में भी प्रतिदिन गोरखनाथ मंदिर में प्रतिपदा से नवमी तक श्रीमद्देवी भागवत की कथा एवं दुर्गा सप्तशती का पाठ शाम 4 बजे से 6 बजे तक संचालित होगा। अष्टमी 16 अक्तूबर की रात से ही लग जाएगी। अन्य लोग अष्टमी पूजन सूर्योदय के पश्चात 17 अक्तूबर को करेंगे, लेकिन मंदिर की परम्परा के मुताबिक योगी 16 अक्तूबर की रात महानिशन पूजन और हवन शक्ति मंदिर में ही करेंगे। इसके लिए वे 16 अक्तूबर की शाम तक मंदिर आ जाएंगे। 17 अक्तूबर को भी मंदिर में पूजा-अर्चना करेंगे।नवमी को होगा कुमारी पूजन और भोज
18 अक्तूबर को महानवमी श्रद्धा के साथ मनाई जाएगी। इस दिन योगी 12 बजे से कन्या पूजन एवं कन्या भोज श्रद्धा पूर्वक संपंन करेंगे। कुवारी विजयादशमी को श्री नाथ जी का विशिष्ट पूजन
19 अक्तूबर को विजयादशमी के दिन सुबह 9.25 से सीएम योगी मंदिर में श्रीनाथ जी की पूजा-अर्चना करेंगे। इस दिन नाथ संप्रदायक के साधु संत और श्रद्धालु तिलक हाल में योगी आदित्यनाथ का तिलक करेंगे। यह कार्यक्रम अपराहन 1 बजे से 3 बजे तक चलेगा। उसके बाद अपराह्न 4 बजे से खुली जीप में सवार होकर योगी शोभा यात्रा के साथ मानसरोवर मंदिर के लिए प्रस्थान करेंगे। जहां भगवान शंकर समेत सभी देवी देवताओं की पारम्परिक रूप से पूजना-अर्चन करेंगे।कन्याओं का पांव धोकर और वस्त्र प्रदान कर पूजा-अर्चना करने के बाद सभी को अपने हाथों से भोजन कराएंगे।रामलीला मैदान में भगवान श्रीराम के राज तिलक में शामिल होंगे योगी
यहीं से सीएम योगी मानसरोवर रामलीला मैदान में पहुंचकर मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम का तिलक और आरती उतारेंगे। रावण बध के कार्यक्रम में शामिल होने के बाद शोभा यात्रा पुन: मंदिर वापस लौट आएगी। शाम 7 बजे से गोरखनाथ मंदिर में संतों, ब्राह्मणों एवं निर्धन नारायण के साथ सहभोज का कार्यक्रम आयोजित होगा। मुख्यमंत्री अगले दिन 20 अक्तूबर को लखनऊ के लिए प्रस्थान करेंगे। गोरखनाथ मंदिर के प्रवक्ता विनय गौतम बताते हैं कि मुख्यमंत्री बनने के पहले योगी आदित्यनाथ नवरात्र में गोरखनाथ मंदिर प्रांगण से बाहर नहीं निकलते थे लेकिन, मुख्यमंत्री का दायित्व संभालने के बाद उन्होंने जनहित में इस परम्परा को तोड़ा है।

 

उज्जैन। निर्वाचन आयोग ने शनिवार को पांच राज्यों राजस्थान, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, मिजोरम और तेलंगाना…

लखनऊ:  यूपी पुलिस में चल रहे विरोध प्रदर्शन के बीच सिपाहियों के लिए बड़ी खुशखबरी आई है. यूपी पुलिस में पहली बार एक साथ 25091 कांस्टेबल को हेड कांस्टेबल के पद पर प्रमोट किया गया है. प्रमोशन पाने वालों में वर्ष 1975 से 2004 बैच के कांस्टेबल शामिल हैं.

इस मामले में डीजीपी ऑफिस ने आदेश जारी कर दिया है. डीजीपी ऑफिस के मुताबिक यह अब तक का सबसे बड़ा प्रमोशन है। इससे पहले साल 2016 में 8762 और साल 2017 में 5030 कांस्टेबल का प्रमोशन हुआ था. डीजीपी ओम प्रकाश सिंह ने बताया कि 2018 में सबसे ज्यादा अराजपत्रित पुलिसवालों को प्रमोशन मिला है. वर्ष 2016 में कुल 15803, वर्ष 2017 में 8910 और वर्ष 2018 में अब तक 36062 लोगों को प्रमोट किया जा चुका है. इसमें 2197 दारोगा इंस्पेक्टर के पद पर और करीब 7600 हेड कांस्टेबल दारोगा के पद पर प्रमोट हुए हैं.


25091 कांस्टेबल के हेड कांस्टेबल प्रमोट होने के बाद भी पुलिस महकमे में हेड कांस्टेबल के करीब 11852 पद खाली पड़े हैं. प्रमोशन के लिए करीब 29000 कांस्टेबल के नाम पर विचार हुआ. लेकिन 4000 को प्रमोशन के लिए उपयुक्त नहीं पाया गया. वहीं कांस्टेबल के इतने बड़े पैमाने पर प्रमोशन के बाद यूपी पुलिस में सिपाहियों के नियतन के मुकाबले करीब 60000 पद खाली हो जाएंगे. हालांकि सिपाहियों के 41610 पदों पर भर्ती के लिए प्रक्रिया चल रही है.

लख्ननऊ/यूपी में योगी सरकार ने हथियारों के लाइसेंस जारी करने पर लगी रोक हटा ली है. यही नहीं अब शस्त्र लाइसेंस लेने के नियम भी बहुत आसान कर दिए गए हैं. हथियार लेने से पहले अब फायरिंग टेस्ट नहीं देना पड़ेगा. साल भर में अब दो सौ कारतूस मिलेंगे लेकिन हथियार ख़रीदने के लिए आधार कार्ड या फिर वोटर पहचान पत्र की कॉपी लगाना होगी .यूपी के गृह विभाग ने इस मामले में नया आदेश जारी कर दिया है. हाई कोर्ट से मिले निर्देश के बाद गृह सचिव भगवान स्वरूप ने राज्य के सभी डीएम को चिट्ठी भी भेज दी है. यूपी में 75 जिले हैं.

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक तरह से यूपी में हथियारों के नए लाइसेंस बनाने पर रोक लगा दी थी. सिर्फ़ कुछ विशेष मामलों में ही लाइसेंस जारी करने की छूट थी. लेकिन ये रोक हटने के बाद से एक पार फिर लाइसेंस लेने के लिए होड़ मच जाएगी. योगी सरकार ने तो अब नियमों में भी छूट दे दी है. यूपी में लाइसेंसी हथियार रखना स्टेटस सिंबल माना जाता है.

प्रमुख सचिव गृह अरविंद कुमार ने बताया कि सरकार ने शस्त्र लाइसेंस पर लगी रोक को हटा लिया है. नया लाइसेंस आयुध नियमावली-2016 के तहत दिया जाएगा. वहीं दूसरे और तीसरे लाइसेंस के लिए डीएम द्वारा औचित्य स्थापित होने पर ही दिया जाएगा. इसके लिए मंडलीय और शासन स्तर पर गठित कमेटी की व्यवस्था को भी समाप्त कर दिया गया है. जानकारी के मुताबिक दिसंबर 2014 में जितेंद्र सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने अपराध पीड़ित, वरासत और खिलाड़ियों को छोड़कर बाकी लोगों को शस्त्र लाइसेंस दिए जाने पर रोक लगा दी थी. लेकिन नवंबर 2017 में कोर्ट ने इस मामले में अपना आदेश वापस ले लिया. इसके बाद से ही सरकार शस्त्र लाइसेंस से रोक हटाने की कवायद में जुटा था. लंबी प्रक्रिया और विधि विशेषज्ञों से राय मशिवरा के बाद सोमवार को इस संबंध में शासनादेश जारी कर दिया गया.

इनके आवेदनों को मिलेगी प्राथमिकता
नए शासनादेश के मुताबिक अपराध पीडि़त, विरासतन, व्यापारी व उद्यमी, बैंक, संस्थागत, वित्तीय संस्थाएं, विभिन्न विभागों के ऐसे कर्मी जो प्रवर्तन कार्यों में लगे हैं, सैनिक, अयुद्ध सैनिक, पुलिस बलों के कर्मचारी, एमएलए, एमएलसी, एमपी, राज्य से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर के निशानेबाजों के आवेदनों को प्राथमिकता दी जाएगी. बैंको की सुरक्षा के लिए जारी किए जाने वाला लाइसेंस बैंक प्रबंधक के स्थान पर असलहा रखने वाले रिटेनर के नाम जारी होगा.

नहीं होगा फायरिंग टेस्ट
नए आदेश में शस्त्र लाइसेंस के लिए जरूरी फायरिंग टेस्ट को खत्म कर दिया गया है. अब लाइसेंस के लिए आवेदन से पहले खाली बंदूक से आवेदक की ट्रेनिंग कराई जाएगी. आवेदक को जिले की पुलिस लाइन एवं रक्षा बलों में कार्यरत आरमोरर से ट्रेनिंग सर्टिफिकेट लेना होगा. लाइसेंस से पहले आवेदक को गोली चलाने की मंजूरी नहीं होगा.

हर्ष फायरिंग पर निरस्त होगा लाइसेंस
नए आदेश के तहत लाइसेंसी असलहे से हर्ष फायरिंग करने पर लाइसेंस निरस्त कर दिया जाएगा. आयुध व गोला बारूद खरीदने के लिए आधार कार्ड, वोटर कार्ड व पासपोर्ट में से किसी एक की फोटोकॉपी देनी पड़ेगी. आयुध व गोला बारूद बेचने वाले को ये दस्तावेज सुरक्षित रखने होंगे. एसडीएम व सीओ नियमित अंतराल पर इसका औचक निरीक्षण करेंगे. साथ ही क्रय विक्रय व सेफ कस्टडी में रखे शस्त्रों के दुरुपयोग को रोकने का काम भी देखेंगे.

एक बार में 100 और साल में ले सकेंगे 200 कारतूस
सरकार ने कारतूसों की खरीदने की संख्या बढ़ा दी है. अब शस्त्र लाइसेंस धारक एक बार में 100 और साल में 200 कारतूस ले सकेंगे. कारतूसों के खोखे जमा करने की बाध्यता भी खत्म कर दी गयी है. हालांकि दोबारा कारतूस खरीदने के दौरान 80 फीसदी खोखे जमा करने पड़ेंगे. आदेश में डीजीपी को निर्देश दिए गए हैं कि वह हर दो माह में खोखों को नष्ट कराने की व्यवस्था कराएंगे. प्रत्येक चार खोखों पर पांच कारतूस ले सकेंगे.

लाइसेंस फीस में बदलाव नहीं
राज्य सरकार ने नये लाइसेंस के लिए फीस में कोई बढ़ोत्तरी नहीं की है. तीन साल में लाइसेंस के नवीनीकरण की अनिवार्यता को भी बरकरार रखा है. आवेदन के नए फार्म में आवेदक को खुद के बारे में कई अहम जानकारियां देनी होंगी.

दो साल में शस्त्र नहीं खरीदा तो लाइसेंस होगा निरस्त
अगर लाइसेंस धारक ने लाइसेंस जारी होने के दो साल के अंदर असलहा नहीं खरीदा तो उसका लाइसेंस निरस्त कर दिया जाएगा. हालांकि यह व्यवस्था की गई है कि अगर लाइसेंस धारक शस्त्र न खरीद पाने के लिए कोई उचित वजह बताएगा तो लाइसेंस जारी करने वाला अधिकारी इस समय सीमा को एक और साल बढ़ा सकता है.

भोपाल/मध्य प्रदेश में गठबंधन को लेकर मायावती की नाराजगी के बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी…

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए पिछले सात दिन से आमरण अनशन पर बैठे महंत परमहंस दास को रविवार देर रात पुलिस ने अनशन स्थल से हिरासत में ले लिया। उन्हें लखनऊ स्थित एसजीपीजीआई में भर्ती कराया गया है।

पुलिस अधीक्षक अनिल सिसौदिया ने बताया कि महंत की हालत लगातार खराब हो रही है। उनकी पल्स रेट काफी नीचे चली गई है। लिहाजा, उन्हें आपात चिकित्सा के लिए एसजीपीजीआई लखनऊ लाया गया है।

गौरतलब है कि महंत परमहंस को मनाने के लिए जिले के प्रभारी मंत्री एवं औद्योगिक विकास मंत्री सतीश महाना रविवार रात 8.45 बजे पहुंचे थे। उन्होंने 20 मिनट तक महंत परमहंस दास से बात की। लेकिन, इस वार्ता के बाद भी महंत परमहंस ने अनशन नहीं तोड़ा।

वार्ता के बाद महंत परमहंस ने बताया कि महाना ने सोमवार दोपहर 12 बजे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से वीडियो कॉल के जरिए बात कराने का आश्वासन दिया। मुख्यमंत्री से वार्ता के बाद यदि सहमति बनती है तभी अनशन टूटेगा।

इसके बाद महंत अनशन स्थल पर लेटे थे। तभी रात करीब 11.15 बजे एक एंबुलेंस सहित पुलिस की पांच गाड़ियां पहुंचीं और महंत को अनशन स्थल से उठा लिया।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की फूलपुर और गोरखपुर लोकसभा सीटों पर हुए उपचुनाव में सपा ने बीजेपी को बड़े अंतर से हराया। इसी के साथ योगी के गढ़ गोरखपुर में पहली बार जील हासिल कर सपा प्रत्याशी प्रवीण निषाद ने इतिहास रच दिया है। गोरखपुर से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी प्रत्याशी ने बड़े अंतर से चुनाव जीत लिया है। 
उपचुनाव में जीत के बाद समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव बसपा सुप्रीमो मायावती के घर पहुंचे। यहां दोनों नेताओं के बीच करीब एक घंटे तक मुलाकात चली। मुलाकात के बाद अखिलेश या मायावती ने मीडिया से तो कुछ नहीं कहा, लेकिन इस मुलाकात के कई संदेश निकाले जा रहे हैं।
आपको बता दें कि जैसे ही अखिलेश यादव मायावती से मिलने के लिए निकले, बसपा सुप्रीमो के घर से एक गाड़ी उनकी अगवानी के लिए भी पहुंची। यूपी की राजनीति में इन दोनों नेताओं की मुलाकात बेहद अहम है। क्योंकि इसी मुलाकात से 2019 के लिए रास्ता निकलेगा।
इससे पहले यूपी उपचुनाव में बसपा के समर्थन से शानदार प्रदर्शन करने वाली समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मायावती को शुक्रिया कहा। अखिलेश ने कहा कि बसपा सुप्रीमो मायावती देश के लिए अहम लड़ाई में उनके साथ आई हैं। अखिलेश ने इसके साथ ही यूपी में बीजेपी की सरकार और सीएम योगी आदित्यनाथ पर भी हमला बोला।
उपचुनाव के नतीजों के बाद समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा, मैं दोनों लोकसभा क्षेत्र की जनता का धन्यवाद देना चाहता हूं। सबसे पहले बसपा प्रमुख मायावती जी का भी धन्यवाद देता हूं, उनकी पार्टी के समर्थन के कारण ही इन चुनावों में जीत हासिल हुई है। उनके अलावा जितनी भी पार्टियों ने समर्थन किया है, उनका भी शुक्रिया करता हूं।
अखिलेश ने कहा कि मुख्यमंत्री का क्षेत्र जो कभी नहीं हारा हो और उपमुख्यमंत्री के क्षेत्र की जनता में ही इतनी नाराजगी है तो बड़े चुनावों में क्या होगा। जीएसटी और नोटबंदी ने कारोबार छीन लिया। पिछले कुछ समय में जो कानून-संविधान की धज्जियां उड़ाई गई हैं उनका ही जवाब मिला है।
अखिलेश बोले कि सदन में मुख्यमंत्री योगी ने कहा था, मैं हिंदू हूं ईद नहीं मनाता हूं। मुझे और बसपा प्रमुख को सांप-छछुंदर का गठबंधन बताया गया। समाजवादी पार्टी को औरंगजेब की पार्टी बताया गया था। ये एक बड़ा संदेश है। बीजेपी ने जो भी वादे किए थे, उनमें से एक भी वादे पर खरे नहीं उतरे हैं। आज की जीत सामाजिक न्याय की जीत है। सपा प्रमुख ने कहा कि बीजेपी देश का नुकसान कर रही है। राष्ट्रवाद के नाम पर जनता को धोखा दिया जा रहा है

गोरखपुर। गोरखपुर लोकसभा उपचुनाव में हाथी पर सवार साइकिल की जीत के निहितार्थ समझने की जरूरत है। भाजपा की असंभव सी लग रही हार के कई कारण हैं। 2019 लोकसभा चुनाव से पहले सपा की इस अविश्वसनीय व अभूतपूर्व जीत ने ऐसा फार्मूला दे दिया है, जिससे बसपा, सपा जैसी हाशिए पर पहुंच चुकी पार्टियां फिर से मजबूती से पांव जमा सकती हैं।


सबसे पहले यह समझने की जरूरत है कि सपा ने सिर्फ जातीय समीकरण के बूते ही चुनाव जीत लिया या अन्य वजह भी रही? दरअसल यूपी में भाजपा सरकार बनने के बाद से ही कार्यकर्ता अक्सर इस बात की शिकायत करते हैं कि उनकी उपेक्षा हो रही है। कई मौकों पर यह देखा गया है कि भाजपा के जनप्रतिनिधि व पदाधिकारी भी असहाय से नजर आते हैं। 


शिक्षामित्रों का सरकार के प्रति रोष, आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों में उपजी अनिश्चितता, यूपी बोर्ड की परीक्षा में हद से ज्यादा सख्ती, चुनाव के दौरान किए गए वादों में से किसी बड़े वादे का अब तक धरातल पर न उतरना आदि प्रमुख कारण थे। भाजपा के परंपरागत शहरी मतदाताओं की बेरुखी ने भी बड़ा अंतर पैदा कर दिया। 

गोरखपुर महानगर के मतदाताओं का बूथ तक पहुंच कर वोट न डालना इस चुनाव का सबसे बड़ा फैक्टर रहा। शहरी मतदाताओं की उदासीनता के भी कई कारण थे। इसमें GST, रोजगार का अभाव, सरकार से असंतोष आदि प्रमुख कारण थे। भाजपा के परंपरागत वोट माने जाने वाले सवर्ण मतदाताओं के वोटिंग प्रतिशत में भारी गिरावट ने तो बड़ा फर्क डाला। 

आंकड़े बताते हैं कि गोरखपुर शहर विधानसभा क्षेत्र एकमात्र ऐसी सीट रही, जहां पुरुषों की तुलना में कम महिलाओं ने वोट डाला।अर्थात भाजपा के परंपरागत वोटर भी जीत को लेकर आश्वस्त थे, इसलिए उनके घरों की महिलाएं बूथ तक नहीं पहुंचीं। ग्रामीण क्षेत्रों में भी कमोबेश यही स्थिति रही। 

अब तक के चुनाव परिणामों को देखें तो यह स्पष्ट हो जाता है कि सपा प्रत्याशी के पक्ष में जातीय समीकरण कारगर साबित हुए। सपा के परंपरागत यादव वोटों के अलावा मुस्लिम मतदाताओं के बीच भी कोई गलत फहमी नहीं थी। सपा द्वारा निषाद प्रत्याशी खड़ा किए जाने से निषादों का मत भी एकतरफा सपा प्रत्याशी के पक्ष में पड़ा। 

बसपा द्वारा खुलकर समर्थन दिए जाने के कारण बसपा के भी परंपरागत वोट काफी हद तक सपा के पक्ष में गये। स्थिति यह बन गई कि या तो मतदाताओं ने भाजपा को वोट दिया या फिर सपा को। यही वजह रही कि कांग्रेस प्रत्याशी सुरहिता करीम चटर्जी अपनी अच्छी छवि व लोकप्रियता के बावजूद 20 हजार वोट भी नहीं पा सकीं।

 

अर्जुन झा रायपुर :छत्तीसगढ़  के सुकमा जिले में नक्सलियों के हमले में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के 9 जवान मारे गए हैं। सुकमा जिले के किस्टाराम इलाके में सीआरपीएफ के जवान बारुदी सुरंग की चपेट में आने के कारण 6 जवान घायल हुए थे। अस्पताल ले जाते हुए एक जवान की मौत हो गई, अभी भी तीन जवानों की हालत बेहद गंभीर बताई जा रही है।

नक्सली हमले पर शोक जताते हुए गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा,' सुकमा, छतीसगढ़ में नक्सलियों द्वारा किए गए कायराना हमले में सी.आर.पी.एफ. के जवानों के शहीद होने की घटना दुर्भाग्यपूर्ण है। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति व दु:ख की इस घड़ी में उनके शोक संतप्त परिवारों को सबल दे। भारत माँ के वीरों को कोटि नमन व श्रद्धांजलि।'

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सुकमा नक्सली हमले में शहीद हुए मध्यप्रदेश के दो जवानों के परिवार वालों के लिए एक-एक करोड़ रु का मुआवजा देने की घोषणा की है।

वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश के शहीद तीन जवानों के परिजनों को 25-25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है, जिसमें से 20 लाख रुपये प्रत्येक शहीद की पत्नी को और पांच लाख रुपये शहीद के माता-पिता को दिए जाएंगे

सुकमा हमले की निंदा करते हुए पूर्व डीजी एस के सूद ने कहा कि एक खास क्षेत्र में सीआरपीएफ बार-बार बड़े हमलों का शिकार हो रही है जिसका मतलब है हम अपनी पुरानी गलतियों से कुछ नहीं सीख रहे हैं। सीआरपीएफ कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा।

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने ट्वीट कर सुकमा हमले में शहीद हुए जवानों को श्रद्धांजलि दी है। राहुल गांधी ने सुकमा में नक्सली हमले को दुर्भाग्यजनक बताते हुए कहा कि यह घटना दिखाती है कि देश की आंतरिक सुरक्षा की हालत बिगड़ती जा रही है। इसकी वजह सरकार की खामियों से भरी गैर-प्रासंगिक नीतियां हैं।

बताया जा रहा है कि किस्टाराम कैंप से 212 बटालियन की टीमें गश्त में निकली थी। करीब सुबह साढ़े सात बजे नक्सलियों ने उन पर फायरिंग शुरु कर दी। जानकारी के मुताबिक करीब 150 नक्सलियों ने मिलकर इस हमले को अंजाम दिया है। उन्होंने जवानों पर अंधाधुंध फायरिंग की और कई विस्फोट भी किए।

फिलहाल नक्सलियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच मुठभेड़ बंद है।

नक्सल ऑपरेशन के डीजी डीएम अवस्थी ने कहा कि किस्टाराम से पलोड़ी कैम्प में सीआरपीएफ की एक टीम एन्टी माइन लैंड व्हीकल से जा रही थी, जिसे आईडी ब्लास्ट से नक्सलियो ने उड़ा दिया है।

युवराज सिंह इलाहाबाद । उत्तर प्रदेश की गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा सीटों के उपचुनाव के नतीजे आज दोपहर तक  घोषित होंगे। निर्वाचन आयोग के सूत्रों के मुताबिक मतगणना का काम सुबह आठ बजे शुरू होगा और 10 बजे तक शुरुआती रुझान मिलने शुरू हो जायेंगे। मतगणना के लिये सभी तैयारियां पूरी कर ली गयी हैं।गोरखपुर और फूलपुर उपचुनाव के लिये मतदान गत 11 मार्च को हुआ था। इस दौरान क्रमशः 47.75 प्रतिशत और 37.39 फीसद वोट पड़े थे। गोरखपुर सीट के लिये 10 तथा फूलपुर सीट पर 22 उम्मीदवार मैदान में हैं। गोरखपुर सीट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के और फूलपुर सीट उप मुख्यमंत्री केशव मौर्य के विधान परिषद की सदस्यता ग्रहण करने के बाद त्यागपत्र देने के कारण रिक्त हुई थी।बता देकी मध्यप्रदेश में भाजपा उप चुनावों में करारी हार झेल चुकी है ऐसे में मुख्य मंत्री योगी और उप मुख्यमंत्री की छोडी सीट पर इस चुनाव को काफी गंभीरता से लिया गया वह बात अलग हैकि गोरखपुर और फूलपुर के मतदाताओं ने उप चुनाव में ज्यादा रूचि नहीं दिखाई इसका हश्र यह रहा की ५० फीसदी से काफी कम वोटिंग हुई आगे देखना हैकि भाजपा कहा तक सफल होती है

 

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