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राजस्थान के मंत्री ने वोटर्स को दी धमकी, कहा-मुझे नहीं जिताया तो आत्महत्या कर लूंगा

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जयपुर। राजस्थान विधानसभा चुनाव को लेकर नेताओं के चुनाव प्रचार जोरों पर हैं। हर क ...

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दिल्ली से कोलकाता तक टीएमसी का प्रोटेस्ट

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नई दिल्ली : नोटबंदी पर केंद्र सरकार को घेरने में जुटी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्र ...

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नई दिल्ली(12 जनवरी): बीएसएफ में खराब खाने की शिकायत करने वाले जवान तेज बहादुर ने नया दावा किया है। जवान ने पत्नी को फोन कर कहा है कि उसे आरोप वापस लेने और माफी मांगने के लिए धमकाया जा रहा है।

 

- इससे पहले, जवान की पत्नी शर्मिला ने कहा, ''तेज बहादुर ने जो किया, सच सामने लाने के लिए किया। लोग कह रहे हैं कि मेरे पति को मेंटल प्रॉब्लम है। ऐसा है तो उन्हें इलाज के लिए क्यों नहीं भेजा? बॉर्डर पर क्यों भेज दिया?''

 

- बता दें कि इस जवान के चार वीडियो पिछले दिनों वायरल हुए थे। इसमें उसने बॉर्डर पर जवानों को ठीक से खाना नहीं मिलने के आरोप लगाए थे।

 

- जवान ने अपनी पत्नी को फोन कर बताया, ''मैंने अधिकारियों को फोन किया। मेरी शिकायत है कि अधिकारी बात नहीं कर रहे। यहां घोटाला हो रहा है। मुझे धमकाया जा रहा है कि आरोप वापस लो और माफी मांगो। मैं चाहता हूं कि मीडिया से मेरी बात कराई जाए, ताकि मैं सफाई दे सकूं।"

 

नई दिल्ली (10 जनवरी): बीएसएफ के सिपाही तेज बहादुर यादव ने फेसबुक पर एक विडियो शेयर कर सनसनी फैला दी है। इस विडियो में अपने उच्च अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

 

उसका आरोप है कि सरकार की तरफ से भेजा जाने वाला राशन उनके वरिष्ठ अधिकारी बाजारों में बेच देते हैं और जवानों को कुछ नहीं मिलता। विडियो वायरल होने के बाद गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने बीएसएफ से रिपोर्ट मांगी है।

 

इसके अलावा बीएसएफ ने जांच के लिए डीआईजी स्तर के अधिकारी को मौके पर भेजने के साथ ही विडियो बनाने वाले जवान तेज बहादुर यादव पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

 

बीएसएफ ने एक बयान में कहा, 'कॉन्स्टेबल तेज बहादुर का एक बुरा अतीत रहा है। करियर की शुरुआत से ही उसे काउंसलिंग की जरूरत पड़ी है।

 

वह लगातार कई दिनों तक ड्यूटी से गायब रहता था, अफसरों से बदसलूकी करता था और शराब का लती था। इन्हीं वजहों के चलते उसे ज्यादातर समय हेडक्वॉर्टर में वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में रखा गया है।'

 

मुंबई: महाराष्ट्र चुनाव आयोग ने बताया कि नागपुर और गोंडिया जिलों में नगर परिषद चुनावों के चौथे और अंतिम चरण में रविवार को औसतन 67.36 प्रतिशत मतदान हुआ.

 

राज्य चुनाव आयोग की एक आधिकारिक विज्ञप्ति के मुताबिक 67.36 प्रतिशत प्रारंभिक आंकड़ा है और एसईसी स्थानीय चुनाव अधिकारियों के उनके पुष्टिकरण प्रक्रिया पूरी करने के बाद अंतिम आंकड़े जारी करेगा.

 

 

दोनों जिलों की 11 नगर परिषदों में 244 सीटों के लिए मतदान रविवार शाम साढ़े पांच बजे समाप्त हुआ. अधिकारियों ने बताया कुछ मतदान केंद्रों पर जहां लंबी कतारें थी, मतदान केंद्र स्तर के अधिकारियों ने मतदाताओं को कतार में पर्ची दी और वोटिंग प्रक्रिया को पूरा किया.

नई दिल्ली (6 जनवरी): कर्ज में डूबे किसानों को जब सूखे का सामना करना पड़ता है तो हताशा और निराशा में उनके सामने खुदकशी के अलावा कोई रास्ता नहीं बचता।

 

प्राकृतिक प्रकोप और सरकारों की उदासीनता के कारण हर साल महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा किसान आत्महत्या करते हैं।

 

नेशनल क्राइम ब्यूरो के रिकॉर्ड्स के मुताबिक 2014-15 के दौरान देश में किसानों की आत्महत्या के मामलों में 42 फीसदी इजाफा हुआ है।

 

2014 में 5650 किसानों ने आत्महत्या की थी, जबकि 2015 में 8007 किसानों ने मौत को गले लगाया। महाराष्ट्र में 3030 किसानों ने आत्महत्या की।

 

 इसके बाद तैलंगाना में 1358 और तीसरे नंबर पर कर्नाटक में 1197 किसानों ने खुदकशी की। भारत के छह राज्यों क्रमशः महाराष्ट्र, तैलंगाना, आंध्र प्रदेश कर्नाटक, मध्य प्रदेश और छत्तीस गढ़, कुल छह राज्यों में सबसे ज्यादा 94.1 प्रतिशत किसानों की आत्महत्या की वारदात होती हैं। 

नई दिल्ली : नोटबंदी पर केंद्र सरकार को घेरने में जुटी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री…

अखिलेश समर्थकों का सपा के बैनर तले चुनाव लडऩे के सवाल पर के.जे. राव का कहना है कि यह बहुत ही मुश्किल है।

 

 

 उन्होंने कहा है कि अगर किसी पार्टी का एकाध नेता अलग होकर दूसरी पार्टी से चुनाव में उतरता है तो आयोग इसकी इजाजत दे सकता है,

 

 

लेकिन अगर बहुत सारे नेता एक साथ किसी पार्टी को तोड़कर किसी दूसरी पार्टी में शामिल होते हैं और उसके चुनाव चिन्ह का प्रयोग करते हैं तो आयोग इस पर आपत्ति जता सकता है।

 

 

अखिलेश के करीबियों का कहना है कि अगर चुनाव आयोग साइकिल चुनाव चिन्ह के रूप में नही देता है तो इसबार साइकिल के बजाय मोटरसाइकिल को अपना निशान बना सकते है.

 

 

सीएम ने करीबियों के साथ मीटिंग के दौरान कहा था कि वह युवा नेतृत्व के प्रतीक है ऐसे में मोटरसाइकिल के रूप में चुनाव चिन्ह जमता है.

 

ऐसे में साइकिल का लेटेस्ट अपडेट वर्जन मोटरसाइकिल उनके लिए अच्छा विकल्प है।

 

 

नई दिल्ली : दो फाड़ हो चुकी समाजवादी पार्टी में अब सुलह की कोशिशें तेज हो गई है और ये जिम्मा उठाया है आजम खान ने. दोनों ही खेमों ने बातचीत अब शर्तों पर आकर टिक गई है. मंगलवार को मुलायम और अखिलेश ने 4 घंटे की लंबी मुलाकात की, लेकिन समाधान नहीं निकल पाया. मुलायम के घर पर अखिलेश के साथ शिवपाल यादव भी मौजूद रहे, लेकिन तीनों नेताओं ने सुलह पर चुप्पी साधी रखी.

 

 

 

बुधवार को अखिलेश अपने समर्थकों के साथ बैठक करेंगे और विवाद खत्म करने को लेकर दोबारा मुलायम से भी मुलाकात कर सकते हैं. सुलह पर आजम खान ने कहा कि नेताजी बहुत पॉजिटिव और नरम हैं, वो चाहते हैं विवाद खत्म हो. विवाद खत्म करने के लिए जो कुछ भी करना पड़े, कर लूंगा.

 

1.मुलायम सिंह यादव राष्ट्रीय अध्यक्ष बने रहें,अखिलेश अपना दावा वापस ले लें.

 

 

 

2.अखिलेश को प्रदेश अध्यक्ष की कमान वापस दे दी जाए और टिकट बंटवारे में उनकी अहम भूमिका रहे.

 

 

 

3.शिवपाल यादव को दिल्ली में राष्ट्रीय महासचिव बनाकर राष्ट्रीय राजनीति में भेज दिया जाये.

 

 

 

4.मुलायम के अमर और अखिलेश के रामगोपाल को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया जाए.

 

 

 

खबरों की मानें तो मुलायम अब अमर सिंह को पार्टी के अंतरराष्ट्रीय मामलों का प्रभारी बनाने के लिए तैयार हैं, जबकि शिवपाल यादव उत्तर प्रदेश छोड़कर राष्ट्रीय मामलों को देखेंगे. वहीं अखिलेश उम्मीदवारों के बारे में फैसला करने के लिए स्वतंत्रता दी जाएगी.

 

 

 

दरअसल कई मौकों पर लगा कि पिता-पुत्र की जोड़ी भले ही मानने को तैयार हो जाती हो, लेकिन जानकारों के मुताबिक जिन शक्तियों से पिता और पुत्र अलग-अलग घिरे हैं, कहीं ना कहीं वो सुलह में रोड़ा बन कर सामने आ जाती है. मुलायम की कमजोरी अमर और शिवपाल हैं, तो वहीं अखिलेश का हाथ रामगोपाल के साथ है. लखनऊ में पिता-पुत्र की मुलाकात के बाद दिल्ली में रामगोपाल यादव के घर अखिलेश गुट की बैठक हुई और रामगोपाल यादव ने सुलह की सारी संभावनाओं को खारिज भी कर दिया. हालांकि पार्टी के सांसद जावेद अली का कहना है कि पार्टी में कोई झगड़ा नहीं है और नेताजी ही उनके आदर्श हैं.

 

 

 

अधिकांश विधायक हमारे साथ: रामगोपाल

मंगलवार को चुनाव आयोग से मुलाकात के बाद रामगोपाल यादव ने बताया कि हमने अपना पक्ष रखा. रामगोपाल यादव ने कहा कि हमारे साथ पार्टी के 90 फीसदी विधायक और 80 से 90 फीसदी डेलीगेट्स हैं. इसलिए असली समाजवादी पार्टी वो है जिसके अध्यक्ष अखिलेश यादव हैं. इसलिए अखिलेश यादव की अध्यक्षता वाली पार्टी को ही समाजवादी पार्टी माना जाए.

 

चुनाव आयोग में मुलायम का पक्ष मजबूत

मुलायम सिंह यादव के करीबी सूत्र ने बताया है कि चुनाव आयोग में मुलायम का पक्ष मजबूत है, क्योंकि पार्टी से बाहर के सदस्यों द्वारा अधिवेशन बुलाना असंवैधानिक है. सिर्फ पार्टी अध्यक्ष ही अधिवेशन बुला सकता है. अखिलेश यादव और रामगोपाल यादव को एसपी में वापस लेने का निर्णय किसी पेपर पर नहीं लिया गया था. उनका निष्कासन वापस लिया जा सकता था, लेकिन उन्होंने अधिवेशन बुला लिया.

 

 

 

किरनमय नंदा ने किया नया खुलासा

इस बीच मुलायम सिंह द्वारा समाजवादी पार्टी से निकाले गए पुराने भरोसेमंद किरनमय नंदा ने आरोप लगाया है कि 1 जनवरी को जारी दो पत्रों में मुलायम सिंह यादव के दस्तखत अलग-अलग हैं. इस बयान के बाद साइन को लेकर नया विवाद शुरू हो गया है. गौरतलब है कि 1 जनवरी को अखिलेश गुट ने लखनऊ में अधिवेशन कर अखिलेश यादव को सपा अध्यक्ष बनाने का ऐलान किया था. इसके बाद मुलायम सिंह यादव ने इस अधिवेशन को असंवैधानिक बताते हुए दो नेताओं किरनमय नंदा और नरेश अग्रवाल को पार्टी से निकालने का आदेश जारी किया था और कहा था कि सपा के अध्यक्ष अभी मुलायम सिंह ही हैं. अब किरनमय नंदा के इस बयान से मामले ने नया मोड़ ले लिया है.

समस्तीपुर: बिहार में समस्तीपुर जिले के विभूतिपुर थाना क्षेत्र के सलखन्नी गांव में मंगलवार शाम अज्ञात अपराधियों ने एक हिन्दी दैनिक के स्थानीय पत्रकार ब्रज किशोर कमल की गोली मारकर हत्या कर दी।

 

पुलिस सूत्रों ने यहां बताया कि जिले के सलखन्नी निवासी पत्रकार कमल गांव में ही जब अपने चिमनी ईंट भट्ठे पर थे तभी अज्ञात अपराधियों ने उनकी गोली मारकर हत्या कर दी। मृतक का बड़ा भाई श्याम किशोर कमल माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के जिला कमिटी के सदस्य हैं।

 

घटना के बाद अपराधी मौके पर से फरार हो गए। सूत्रों ने बताया कि घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंच कर मामले की छानबीन कर रही है। घटना के कारणों का तत्काल पता नहीं चल सका है।

 

बताते चलें कि इससे पहले सीवान जिले के पत्रकार राजदेव रंजन को भी इसी साल 13 मई को ऑफिस से घर लौटते समय कुछ अपराधियों ने गोली मार दी थी।

 

इस मामले में उनकी पत्नी आशा रंजन ने आरजेडी के पूर्व सांसद शहाबुद्दीन पर साजिश का आरोप लगाया था। 26 दिसंबर की रात उनके मोबाइल पर किसी अज्ञात शख्स ने धमकी भी दी थी।

 

 

 

 

नई दिल्ली : बाप-बेटों के बीच बंट चुकी समाजवादी पार्टी की लड़ाई अब साइकिल के लिए है. साइकिल की सवारी कौन करेगा? अखिलेश करेंगे या मुलायम सिंह यादव साइकिल पर अपना कब्जा जमाएंगे? इसी सवाल के बीच आज अखिलेश खेमा साइकिल चुनाव चिन्ह पर दावा ठोकेगा. रामगोपाल यादव मंगलवार सुबह साढ़े 11 बजे चुनाव आयोग पहुंचेंगे. सोमवार को मुलायम खेमा साइकिल पर कब्जा जमाने के लिए चुनाव आयोग पहुंचा. लेकिन इस बीच पिता और पुत्र के बीच सुलह की भी कोशिश की जा रही है और ये जिम्मा उठाया है आजम खान ने. सुलह का फॉर्मूला लेकर आजम खान दिल्ली पहुंच गए हैं, लेकिन मुलायम आजम से बिना मिले लखनऊ रवाना हो गए.

 

 

 

 

 

 

 

खबर है कि आजम से वरिष्ठ नेताओं ने फिर से दोनों के बीच समझौता कराने की अपील की है. आजम ने बोला है कि वो आखिरी बार करेंगे. आजम के पास नया फॉर्मूला है कि मुलायम कुछ अपनी पसंद छोड़ें और कुछ अखिलेश छोड़े. बाद में मिल बांटकर टिकट का फैसला कर लें. दोनों पक्ष चुनाव आयोग में आमने-सामने हैं, लेकिन पिछले दरवाजे से पिता-पुत्र में समझौते की नई पहल की जा रही है. लेकिन अखिलेश गुट के नरेश अग्रवाल ने कहा है कि हमारी तरफ से सुलह की कोशिश नहीं होगी. अधिवेशन में जो भी प्रस्ताव पास हुए वो हम चुनाव आयोग के सामने रखेंगे. सभी कार्यकर्ता अखिलेश के साथ हैं. पोस्टर, बैनर में नेताजी की फोटो पहले होगी.

 

 

 

किरनमय नंदा ने किया नया खुलासा

 

 

 

इस बीच मुलायम सिंह द्वारा समाजवादी पार्टी से निकाले गए पुराने भरोसेमंद किरनमय नंदा ने आरोप लगाया है कि 1 जनवरी को जारी दो पत्रों में मुलायम सिंह यादव के दस्तखत अलग-अलग हैं. इस बयान के बाद साइन को लेकर नया विवाद शुरू हो गया है. गौरतलब है कि 1 जनवरी को अखिलेश गुट ने लखनऊ में अधिवेशन कर अखिलेश यादव को सपा अध्यक्ष बनाने का ऐलान किया था. इसके बाद मुलायम सिंह यादव ने इस अधिवेशन को असंवैधानिक बताते हुए दो नेताओं किरनमय नंदा और नरेश अग्रवाल को पार्टी से निकालने का आदेश जारी किया था और कहा था कि सपा के अध्यक्ष अभी मुलायम सिंह ही हैं. अब किरनमय नंदा के इस बयान से मामले ने नया मोड़ ले लिया है.

 

 

 

 

 

 

 

चुनाव आयोग में मुलायम का पक्ष मजबूत

 

 

 

मुलायम सिंह यादव के करीबी सूत्र ने बताया है कि चुनाव आयोग में मुलायम का पक्ष मजबूत है, क्योंकि पार्टी से बाहर के सदस्यों द्वारा अधिवेशन बुलाना असंवैधानिक है. सिर्फ पार्टी अध्यक्ष ही अधिवेशन बुला सकता है. अखिलेश यादव और रामगोपाल यादव को एसपी में वापस लेने का निर्णय किसी पेपर पर नहीं लिया गया था. उनका निलंबन वापस लिया जा सकता था, लेकिन उन्होंने अधिवेशन बुला लिया.

 

 

 

 

 

 

 

चुनाव आयोग से मिले मुलायम

 

 

 

इससे पहले सोमवार दोपहर मुलायम सिंह के दिल्ली वाले आवास पर करीब 2 घंटे तक अखिलेश विरोधी गुट के नेताओं की बैठक चली, जिसमें खुद मुलायम सिंह , शिवपाल यादव, अमर सिंह, जयाप्रदा और अंबिका चौधरी शामिल हुए. बैठक के बाद मुलायम, शिवपाल, अमर सिंह और जया प्रदा चुनाव आयोग में अपनी शिकायत लेकर पहुंचे. चुनाव आयोग को मुलायम सिंह यादव ने पार्टी में हुए ताजा राजनीतिक घटनाक्रम की जानकार दी. सूत्रों के मुताबिक मुलायम ने आयोग को बताया कि दूसरे खेमे की राजनीतिक कार्यवाही पार्टी संविधान के खिलाफ है और जो रामगोपाल ने अधिवेशन बुलाया वो असंवैधानिक है, क्योंकि रामगोपाल और अखिलेश यादव को पहले ही पार्टी से निकाला जा चुका है. आयोग के सामने मुलायम ने 'साइकिल' चुनाव चिन्ह पर भी अपना हक जताया.

 

 

 

 

 

 

 

'अखिलेश खुद में बड़े ब्रांड'

 

 

 

पार्टी सिंबल को लेकर जारी विवाद में अखिलेश के समर्थक एमएलसी उदयवीर सिंह ने कहा कि हम अखिलेश के नाम पर चुनाव लड़ेंगे. उदयवीर ने कहा कि अखिलेश खुद में ब्रांड हैं. उदयवीर ने हालांकि उम्मीद जताई कि नेताजी समझाने पर मान जाएंगे.

 

 

 

 

 

 

 

मेरे साथ नेताजी के भी नारे लगाएं

 

 

 

इस बीच मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भी अपने करीबी विधायकों और नेताओं के साथ मुलाकात की. बैठक में उनसे कहा कि वे चुनाव की तैयारी करें. अखिलेश ने कहा कि हम और नेताजी एक ही हैं. आप हमारे नारे लगाते हैं तो उनके भी लगाएं. आप लोग उनसे भी मिलें. अखिलेश मंगलवार को एक बार फिर कार्यकर्ताओं से मुलाकात करेंगे.

 

 

 

 

 

 

 

मैं पूरी तरह से फिट

 

 

 

दिल्ली के लिए रवाना होने से पहले मुलायम ने कहा कि मैं पूरी तरह से फिट हूं. मीडिया ने मेरा हमेशा साथ दिया, मैंने कोई भ्रष्टाचार या गलत काम नहीं किया है. आरोप लगा तो सुप्रीम कोर्ट ने मुझे बरी कर दिया. उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी मेरी है और इसका चुनाव चिह्न भी मेरा है.

नई दिल्ली :पिता से दूरी बनाने और समाजवादी पार्टी में जो कुछ गलत हो रहा है उसका ठीकरा अपने चाचा श‍िवपाल पर फोड़ने वाले अखिलेश सिंह यादव की यूपी में लोकप्रियता बढ़ती जा रही है. इसे देखकर बीजेपी और बसपा सशंकित हो गई हैं.

 

बीजेपी में अब इस बात के लिए दबाव बढ़ रहा है कि यूपी चुनाव के लिए वह कोई मुख्यमंत्री को चेहरा सामने लाए.

 

सपा के घमासान ने दूसरे दलों का चुनावी गणित भी गड़बड़ा दिया है. बीजेपी और बसपा जैसे राजनीतिक दल सांस रोके हुए पूरे हालात पर नजर गड़ाए हुए हैं. खासकर शनिवार को चाचा-भतीजा के बीच जो टकराव हुआ, उससे अख‍िलेश यादव की पार्टी में स्थिति और मजबूत हुई है और उनके साथ बड़ी संख्या में विधायकों के दिखने से साफ हो गया है कि सपा का असल नेता कौन है.

 

इसके बाद अब बीजेपी को भी अपनी रणनीति बदलनी पड़ सकती है. अखिलेश यदि अपनी पार्टी के पूरे भूचाल को नियंत्रण में कर लेते हैं और विरोध को पूरी तरह से दबा देते हैं, तो बीजेपी को कोई सीएम चेहरा सामने लाने को मजबूर होना पड़ सकता है.

 

हालांकि कुछ बीजेपी के नेताओं का कहना है कि समाजवादी पार्टी में जो कुछ हो रहा है वह तय 'पटकथा' के मुताबिक ही है और जनता इस बात को समझ रही है. बीजेपी नेताओं का कहना है कि वह अभी देखने और इंतजार करने की ही नीति अपनाएंगे, क्योंकि अखिलेश को मजबूत और अच्छी छवि का पेश करने का जो 'ड्रामा' चल रहा है , उससे उनकी लोकप्रियता आगे चलकर कम हो सकती है.

 

बीजेपी के सामने मुश्किल यह भी है कि पार्टी में किसी एक चेहरे को लेकर एकराय नहीं है और इस समय किसी भी चेहरे को पेश करने से बहुत से नेताओं के बागी होने की आशंका बनी हुई है.

 

कुछ बीजेपी नेताओं का कहना है कि बीजेपी अब अस्थिरता और कुनबे की लड़ाई को अपना मंत्र बनाकर लोगों के बीच जाएगी और स्थिरता और विकास जैसे नारों के साथ वोट मांगेगी. उनका कहना है कि सपा की लड़ाई सूबे में भाजपा के लिए अच्छे दिन का संकेत हैं.

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