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Bihar (2)

बिहार के मंत्री के घर में हुई शराब की दावत.

बिहार के मंत्री के घर में हुई शराब की दावत.

जहानाबाद। क्या शराबबंदी को लेकर नीतीश की सारी कोशिशें धराशाही हो गई है। क्या नीत ...

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Madhay Pradesh (28)

रीबा: त्योथर के जाने माने कांग्रेसी नेता कौशलेश द्विवेदी म.प्र.कांग्रेस कमेटी के सचिव बने.समर्थको मे उत्साह

रीबा: त्योथर के जाने माने कांग्रेसी नेता कौशलेश द्विवेदी म.प्र.कांग्रेस कमेटी के सचिव बने.समर्थको मे उत्साह

(त्योंथर,रीबा) आखिरकार राहुल गांधी के त्योंथर आगवन के बाद बिंध्य छेत्र के सफेद श ...

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Other State (1)

दिल्ली से कोलकाता तक टीएमसी का प्रोटेस्ट

दिल्ली से कोलकाता तक टीएमसी का प्रोटेस्ट

नई दिल्ली : नोटबंदी पर केंद्र सरकार को घेरने में जुटी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्र ...

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फैजाबाद। अयोध्या में नयाघाट इलाके में साकेत भवन मंदिर के महंत दयानन्द दास का अपहरण हो गया है। उनके अपहरण की सूचना के बाद यूपी पुलिस के होश उड़ गए हैं। पुलिस उन्हे सकुशल बरामद करने में जुटी हुई है।


आरोप है कि मंदिर की संपत्ति और महंती को लेकर उनके ही एक शिष्य रामदास ने उनका अपहरण किया है। पुलिस ने पांच लोगों के खिलाफ अपहरण का मुकदमा दर्ज करके कार्रवाई शुरू कर दी है। दरअसल अयोध्या में मंदिर की संपत्ति और महंती को लेकर एक बार फिर बड़ी वारदात को अंजाम दिया गया है। महंत दयानन्द दास अयोध्या के नयाघाट इलाके में साकेत भवन मंदिर के महंत है। महंत दयानन्द दास 80 वर्षीय वयोवृद्ध संत हैं और पिछले काफी दिनों से लकवाग्रस्त होने के चलते चल फिर पाने में असमर्थ है। आरोप है कि ऐसे में अब मंदिर की संपत्ति और महंती पर उनके ही एक शिष्य राम दास की नज़र है। आरोप है कि राम दास सबकुछ ज़बरन हासिल कर लेना चाहता है। इसीलिए उसने महंत की अपहरण की साज़िश रच डाली।
 
महंत के शिष्य राम दास पर अपहरण का आरोप 
अयोध्या कोतवाली क्षेत्र के साकेत भवन मंदिर के 80 वर्षीय महंत दयानंद दास का दो बाइकसवार 5 लोगों ने अपहरण कर लिया। अपहरण की सूचना देर रात उनके एक शिष्य सीताराम दास ने यूपी हंड्रेड पुलिस को दी। यूपी हंड्रेड व डीएसपी अयोध्या राजू कुमार ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की और फिर पुलिस ने आरोपी राम दास समेत पांच लोगो के खिलाफ अपहरण का मुकदमा दर्ज कर लिया है।

पुलिस अधीक्षक नगर अनिल सिंह सिसोदिया के मुताबिक़ पुलिस ने वासुदेव घाट से अपहरणकर्ताओं की दोनों बाइक भी बरामद कर ली है, लेकिन तब तक अपहरणकर्ता स्कार्पियो से महंत दयानंद दास को लेकर फरार हो चुके थे। अब पुलिस अपहरणकर्ताओं की तलाश में जुटी है। ऐसे में अब महंत दयानन्द दास की सकुशल बरामदगी पुलिस के लिए चुनौती बन गई है।

(योगेश पाणिग्रही ,जगदलपुर)  माओवाद प्रभावित बस्तर के  सुकमा जिले में  बीती रात  माओवादियों ने जमकर उत्पात मचाते हुए 3 यात्री बस सहित  6 वाहनों को आग के हवाले कर दिया  वहीं एक ग्रामीण की गला रेतकर हत्या भी कर दी  ऐसा माना जा रहा है  ।होली के दिन  बीजापुर जिले  की सीमा पर  तेलंगाना  की  ग्रेहाउंड  पुलिस  ने लगभग एक दर्जन माओवादियों को मौत के घाट उतार दिया था जिसके बाद बौखलाए माओवादियों ने कराना करतूत करते हुए यात्री बस सहित छह वाहनों को आग के हवाले कर दिया ।

 

सूत्रों से प्राप्त जानकारी के सुकमा जिला मुख्यालय  से लगभग 30 किलोमीटर दूर राष्ट्रीय राजमार्ग 30 के गोंडा मार्ग पर स्थित दौरनापाल थाना से लगभग 7 से 8 किलोमीटर दूर ग्राम कुर्ती  के पास में  माओवादियों ने यात्री 3  यात्री बसें 3 ट्रकों को आग के हवाले कर दिया । 3  यात्री बसों में  जगदलपुर से तेलंगाना जा रही तेलंगाना स्टेट ट्रांसपोर्ट की बस जो कि से हैदराबाद की ओर चलती है उसे आग के हवाले कर दिया गया। वही अश्वनी राजकुमार जगदलपुर की कंपनी की  बस जो कि मल्कानगिरि से हैदराबाद के लिए संचालित होती थी उसे भी माओवादियों ने  अपने कायराना करतूत को अंजाम देते हुए जला दिया इसी प्रकार एक अन्य बस जिसकी जानकारी अप्राप्त है वही जगदलपुर से आंध्र एवं तेलंगाना की ओर चलने वाली 3 ट्रकों को भी आग के हवाले कर दिया गया कुल मिलाकर माओवादियों ने जमकर उत्पात मचाया।

 बस से उतरकर ग्रामीण की हत्या

  सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार मल्कानगिरि से हैदराबाद की ओर जाने वाली बस का माओवादियों ने जांच पड़ताल किया और वहां से एक ग्रामीण सोनी मुन्ना को नीचे उतार कर उसकी हत्या कर दी। इस घटना के बाद क्षेत्र में दहशत का आलम है और इस सड़क मार्ग पर आवाजाही बंद कर दी गई है। ज्ञात हो कि होली के दिन 2 मार्च को तेलंगाना राज्य की पुलिस की स्पेशल टीम ग्रेहाउंड टीम ने 10 माओवादियों को बीजापुर जिले के जंगलों में मार दिया था जिसके बाद से इस क्षेत्र में माओवादियों की एक विशेष बैठक किए जाने की जानकारी कृपया सूत्रों के माध्यम से मिल रही थी इसी बीच माओवादियों ने सुकमा जिले में उत्पाद कर अपने मंसूबे को स्पष्ट कर दिया।

 

  नए एआरएमटी बस 6 घंटे में राख में तब्दील

 

पुलिस सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार अश्विनी राजकुमार की नई बस को इस क्षेत्र में चलाने के लिए कल ही विधिवत पूजा अर्चना कर निकाली गई थी और वह अपने नियत स्थान से गंतव्य की ओर निकला ही था कि माओवादियों ने उसे भी रोक लिया तथा आग के हवाले कर दिया जिससे नया बस 6 घंटे के भीतर ही राख  में तब्दील हो गया।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को सदन में राज्यपाल के अभिभाषण पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए पूर्ववर्ती सरकारों पर जमकर निशाना साधा। योगी के भाषण के दौरान समाजवादी पार्टी (सपा) और सत्ता पक्ष के बीच तीखी नोक-झोंक हुई। योगी ने कहा कि राज्य को बांटने की इजाजत किसी को नहीं दी जाएगी और अगर कोई ऐसा करने की कोशिश करेगा तो सरकार उसका मुंहतोड़ जवाब देगी। कैबिनेट मंत्री नंद गोपाल नंदी के विवादित बयान को लेकर विधान परिषद की कार्यवाही हंगामे की वजह से कई बार स्थगित करनी पड़ी। हंगामा बंद न होने की वजह से सभापति ने सदन की कार्यवाही को 12 मार्च तक के लिए स्थगित कर दिया।

इस बीच विधानसभा में अपने भाषण के दौरान योगी आदित्यनाथ विपक्ष पर हमलावर दिखाई दिए। उन्होंने कहा कि इस सरकार ने 11 महीने के काम में ही दिखा दिया है कि विकास कैसे हो सकता है। हमने राज्य में विकास के लायक माहौल बनाया है। इसके लिए सरकार निरंतर काम कर रही है। उन्होंने कहा, ‘‘लखनऊ में 21-22 फरवरी को इन्वेस्टर्स समिट इस बात का परिणाम है कि आज देश ही नहीं विदेश से भी निवेशक दिल खोलकर उत्तर प्रदेश में निवेश करने के लिए उत्सुक हैं। यह सरकार की मेहनत का ही नतीजा है। जो कार्य पिछली सरकारें15 वर्षों में नहीं कर पाई वो हमने 11 महीने में ही करके दिखा दिया है।’’

समाजवादी पार्टी का नाम लेते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘वे अपनी तोडऩे की नीति अपने पार्टी तक ही सीमित रखें तो बेहतर होगा। जो भी भारत को तोडऩे का काम करेगा, हम उसे तोड़ देंगे। प्रदेश और देश को तोडऩे का प्रयास किया जाएगा तो दंडकारी नीति से निपटा जाएगा।’’ मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद भाजपा विधायकों ने भारत माता जय के नारे लगाए, जबकि विपक्ष ने हंगामा शुरू कर दिया। नेता विपक्ष रामगोविंद चौधरी ने कहा कि सरकार डराकर विपक्ष का मुंह बंद कराना चाहती है लेकिन हम इनसे डरने वाले नही हैं। चौधरी ने कहा कि कभी अंग्रेजों की दलाली करने वाले लोग आज समाजवादियों की निष्ठा पर सवाल खड़े कर रहे हैं।

दोनों पक्ष के सदस्यों के बीच हो रही नोंकझोंक के बीच विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित ने बीच में हस्तक्षेप कर सदस्यों को शांत कराया और कहा कि सदन की परंपरा यही है कि जब नेता सदन बोल रहा हो तो किसी को बीच में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। इसके बाद सदस्य शांत हो गए। हंगामे के बाद भी मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर लगातार हमला जारी रखा। उन्होंने कहा कि बरसाना होली मनाने गया था। वहां सवाल पूछा गया कि ईद कहां मनाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘मैने तब भी कहा था और आज भी गर्व के साथ कहता हूं कि मैं हिंदू हूं। मैं ईद नहीं मनाता। लेकिन, यदि कोई अपना त्योहार मनाएगा तो सरकार उसमें सहयोग करेगी और साथ ही सुरक्षा भी देगी।’’

मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर चुटकी लेते हुए कहा, ‘‘हमें हिंदू होने पर गर्व है। लेकिन हम वैसे हिंदू नहीं हैं जो घर में जनेऊ धारण करें और बाहर निकलकर टोपी पहन लें। ऐसा वो लोग करते हैं, जिनके मन में पाप होता है।’’ विपक्ष के हंगामे पर मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र लोकलाज से चलता है, न कि जबरदस्ती से। राज्यपाल पर कागज के गोले फेंकना शोभनीय नहीं है। जबरन लोकतंत्र चलाने की कोशिश नहीं की जा सकती।

उन्होंने कहा, ‘‘सपा सरकार ने समाज को बांटने का काम किया है। पिछली सरकारों के दौरान प्रदेश में भय का माहौल था। सरकारों ने किसानों की उपेक्षा की। प्रदेश की गरीब जनता उपेक्षा का शिकार हुई।’’ योगी ने कहा कि पिछली सरकार को परिवार, परिवार के विकास, तुष्टीकरण, भ्रष्टाचार, गुंडाराज और अराजकता फैलाने से फुर्सत नहीं थी। प्रदेश के अंदर भय का माहौल पैदा करने और लूट-खसोट करने से फुर्सत नहीं थी। ऐसे में प्रदेश के विकास की बात कैसे सोचते। लेकिन मेरी सरकार ने पिछले एक साल में बहुत कुछ बदला है।’’

इधर, कैबिनेट मंत्री नंद गोपाल नंदी द्वारा मुलायम सिंह यादव को रावण और मायावती को शूर्पणखा कहे जाने से गुस्साए सपा और बसपा नेताओं ने मंगलवार को विधान परिषद में हंगामा किया। इसके चलते सदन की कार्यवाही 20 मिनट के लिए स्थगित कर दी गई। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही सपा और बसपा नेता नारेबाजी कर नंद गोपाल को बर्खास्त करने की मांग करने लगे। दोनों ही पार्टियों के नेताओं ने नंदी के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित करने की मांग की।

नंदी की बर्खास्तगी पर अड़े विपक्षी नेता आसन के समीप आकर हंगामा करने लगे तो सभापति ने उन्हें अपनी सीट पर बैठने के लिए कहा लेकिन जब वे नहीं माने तो कार्यवाही 20 मिनट के लिए स्थगित कर दी गई। बाद में हंगामा बंद न होने की वजह से विधान परिषद की कार्यवाही 12 मार्च तक के लिए स्थगित कर दी गई। 

इलाहाबाद /अगर विवाह में घोटाला हो जाये तो क्या हो या फिर घोटाले से विवाह हो जाये तो क्या हो। चूना किसी ना किसी को तो लगना ही है। लेकिन अब जो विवाह घोटाला हुआ है उसमें चूना लगा है सरकार को और माल उड़ा ले गये अफसर और पहले से शादीशुदा लोग। दरअसल उत्तर प्रदेश में 'मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना' में बड़ा घोटाला सामने आया है। समाज कल्याण विभाग के तहत वार्षिक 250 करोड़ रुपये के बजट वाली यह योजना गरीब लड़कियों की शादी के लिए है लेकिन लोग इसका बेजा फायदा उठाने में लगे हैं।

दिल्ली से सटे ग्रेटर नोएडा में 11 जोड़ों ने पहले से शादीशुदा होते हुए भी 20 हजार रुपए की रकम, गहने और उपहारों के लालच में फिर से 'सरकारी शादी' रचा ली। समाचार रिपोर्टों में बताया गया है कि इनमें से 3 जोड़ों के तो पहले से कई-कई बच्चे भी हैं। सरकार का लक्ष्य इस वित्तीय वर्ष में 10 हजार विवाह कराने का है तो ऐसे में अधिकारियों पर भी दबाव रहता है कि जिले में ज्यादा से ज्यादा जरूरतमंदों का विवाह कराया जाये लेकिन इसी दबाव के चलते घपले भी हो जाते हैं।

 

ताजा मामला 24 फरवरी को ग्रेटर नोएडा के वाईएमसीए क्लब में 66 जोड़ों का सामूहिक विवाह का है। इसमें 11 जोड़ों की फर्जी शादी की बात सामने आई है। यही नहीं एक जोड़े का तो 10 साल का बेटा भी है। मामले का खुलासा होने से सरकारी अधिकारियों के बीच हड़कंप मचा हुआ है और उन ग्राम प्रधानों और जिले के अफसरों की खोज की जा रही है जिन्होंने सरकारी योजना के तहत इन जोड़ों का विवाह कराने की संस्तुति की थी। इस सामूहिक विवाह कार्यक्रम में नवदंपतियों को आशीर्वाद देने केंद्रीय मंत्री डॉ. महेश शर्मा, दादरी के विधायक तेजपाल नागर, जेवर के विधायक ठाकुर धीरेंद्र सिंह, डीएम और डीआईजी समेत कई अफसर पहुंचे थे। 

 

ऐसा नहीं है कि सामूहिक विवाह योजना के तहत घोटाला पहली बार उजागर हुआ है। इससे पहले भी यह योजना हाल ही में तब विवादों में आई थी जब ओरैया में 25 दुल्हनों ने आरोप लगाया था कि उन्हें नकली गहने दिये गये। इसके अलावा जो राशि दुल्हनों को देने की बात कही गयी थी उसमें से 15-15 हजार रुपये विवाह की व्यवस्था कराने के नाम पर काट लिये गये। अन्य जिलों में भी फर्जी जोड़ों के विवाह का मामला सामने आया था तब अधिकारियों ने दान का सामान तो वापस ले लिया लेकिन जो राशि दुल्हनों को दी गयी थी उसका क्या हुआ यह बात अभी तक स्पष्ट नहीं हो पायी है।

 

जो गरीब हैं और जिनकी शादी नहीं हुई है वह तो सामूहिक विवाह योजना के तहत अपनी शादी कराने के लिए आ जाते हैं लेकिन आइए जानते हैं शादीशुदा लोग क्यों और किस लालच के तहत दोबारा से अपने जीवनसाथी के साथ ही फिर से फेरे लेते हैं।

 

-हर दंपति को कुछ गहने तथा घर की जरूरत से जुड़ा सामान सरकार की तरफ से तो दिया ही जाता है साथ ही कुछ सामाजिक संगठनों और कार्यकर्ताओं की ओर से भी नवदंपतियों को आर्थिक रूप से मदद प्रदान की जाती है।

-प्रशासन की तरफ से दुल्हन को 20 हजार रुपये का चेक प्रदान किया जाता है।

ज्ञान चन्द्र मिश्र /सुदीप सिंह भोपाल / उप चुनाव में लगातार पार्टी प्र्यासियो की पराजय के बाद मध्यप्रदेश भाजपा में संगठनात्मक बदलाव जल्द होने के आसार है .अटेर, चित्रकूट, मुंगावली, कोलरस की हार ने बीजेपी वर्कर को जैसे हारने की आदत डाल दी है. जो कि अगले चुनाव में भारी पड़ सकती है. इतना ही नहीं अब प्रदेश में बागियों की ताकत भी दिखने लगी है. हाल ही में हुए नगर पालिका चुनाव में कई बागियों ने मैदान संभाला जिसका सीधा फायदा कांग्रेस के खाते में गया.  त्रिपुरा, मेघायल और नागालैंड में मिली ऐतिहासिक जीत के बाद मध्य प्रदेश बीजेपी संगठन में बदलाव देखने मिल सकता है। राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने मध्य प्रदेश के टॉप नेताओं को एक बंद कमरे में मीटिंग के दौरान जोश भरते हुए कहा था कि दुनिया में जीत का कोई दूसरा उपाय नहीं है। शाह ने मणिपुर चुनाव की बात करते हुए बताया था कि एक कैसे 2.5 प्रतिशत वोट को 38 प्रतिशत तक पहुंचाया गया। लेकिन ऐसा लगता है मध्य प्रदेश के बीजेपी नेताओं पर अमित शाह की बातों का कोई असर नहीं हुआ।
भोपाल में रविवार को मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री ने एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि उन्हें मुंगावली और कोलारस उपचुनाव हारने पर अफसोस है। बता दें कि मध्य प्रदेश में बीजेपी का संगठन कमजोर हुआ है। एक तरफ जहां चार साल में त्रिपुरा के विधानसभा चुनाव में 40 प्रतिशत वोट पाकर सत्ता पर पहुंच गई, वहीं मध्य प्रदेश में बीजेपी मुंगावली और कोलारस के उपचुनाव में मात्र 10-12 फीसदी वोट ही बढ़ा पाई है। एमपी में हुए उपचुनाव में मिली हार के बाद पार्टी हाईकमान ने हार की समीक्षा करना शुरू कर दिया है। कोलारस और मुंगावली में बीजेपी की लड़ाई सिर्फ सिंधिया परिवार से नहीं थी, बल्कि बीजेपी कांग्रेस के मनोबल का तोड़ना चाहती थी। शिवराज ही सीएम और शिवराज ही संगठन
दरअसल त्रिपुरा जीतने वाली बीजेपी का संगठन मध्य प्रदेश में कमजोर हुआ है. सिर्फ चार साल में चालीस पर्सेंट वोट बैंक हासिल कर त्रिपुरा में करिश्मा करने वाली बीजेपी मध्य प्रदेश के मुंगावली- कोलारस के उपचुनाव में सिर्फ दस और तेरह पर्सेंट वोट ही बढ़ा पाई है. इस हार को लेकर अब संघ और पार्टी हाईकमान में चिंतन शुरू हो गया है क्योंकि ये लड़ाई सिर्फ सिंधिया के खिलाफ नहीं बल्कि कांग्रेस का मनोबल को तोड़ने के लिए भी लड़ी जा रही थी.

पार्टी के सीनियर लीडर मानते हैं कि मुंगावली और कोलारस ने साफ़ कर दिया है कि मध्य प्रदेश में सत्ता भारी और संगठन कमजोर हो रहा है. संगठन कार्यकर्ता से ज्यादा सत्ता के भरोसे हो गया है. शिवराज ही सीएम और शिवराज ही संगठन दिखाई दे रहे हैं. बीजेपी अध्यक्ष नंदकुमार सिंह की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं. शिवराज और नंदकुमार का एक साथ होना और बीजेपी के संगठन महामंत्री सुहास भगत का अलग- थलग दिखाई पड़ना पार्टी कार्यकर्ताओं में असंतोष पैदा कर रहा है सिंधिया ने संघ शैली में चुनाव लड़ा
एक सीनियर लीडर मानते हैं कि मुंगावली कोलारस में सरकारी मशीनरी ज्यादा प्रभावी दिखी जिसके चलते फर्जी वोटर लिस्ट मामले में कलेक्टर तक को बदलना पड़ा. बीजेपी जहां चुनाव में सत्ता और सरकारी मशीनरी के भरोसे दिखाई दे रही थी, वहीं सिंधिया अपना चुनाव संघ की शैली में लड़ते दिखाई दिए. उनकी पन्ना कमेटियों का ही कमाल है कि उनके कार्यकर्ताओं ने घर-घर जाकर वोटर लिस्ट चेक की और फर्जी वोटर्स को बाहर किया और कलेक्टर समेत कई अधिकारियों की छुट्टी करवाई.

वहीं पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि मुंगावली और कोलारस उपचुनाव में साफ हो गया है कि प्रदेश में संगठन पर सत्ता भारी है। संगठन कार्यकर्ता से ज्यादा सत्ता पर निर्भर हो गया है। मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री शिवराज और शिवराज ही संगठन देखते हैं।  प्रदेश में बीजेपी अध्यक्ष नंदकुमार सिंह की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं। यहां पर नंदकुमार और शिवराज का एक साथ होने से बीजेपी संगठन के महामंत्री सुहास भगत अलग पड़ गए हैं। जिससे पार्टी कार्यकर्ताओं में असंतोष पैदा हो रहा है
मध्य प्रदेश बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता कहत हैं कि भारतीय जनता पार्टी अपने कैडर और कार्यकर्ता के बल पर चलने वाली पार्टी है। एक प्रभावशाली संगठन और समानांतर सरकार उसकी बड़ी ताकत है, पहले चाहे कप्तान सिंह ने बतौर संगठन महामंत्री का कार्यकाल रहा हो या माखन सिंह, अरविंद मेनन का, सत्ता यहां पर हमेशा दो गुटों में बंटती रही है। वहीं सुहास भगत सिंह अपनी भूमिका में कहीं नजर नहीं आ रहे हैं। 

युवराज सिंह इलाहाबाद गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा उपचुनाव में सपा और बसपा के साथ आने के बाद कांग्रेस पर भी दबाव बढ़ गया है। पार्टी के अंदर एक बड़ा तबका इन दोनों सीट पर अपने उम्मीदवारों को वापस कर सपा के समर्थन की वकालत कर रहा है। इन नेताओं की दलील है कि इससे 2019 के लोकसभा चुनाव में पार्टी की महागठबंधन की कोशिशों को बल मिलेगा।

उत्तर प्रदेश कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि गोरखपुर और फूलपुर में पार्टी उम्मीदवार जीत से काफी दूर हैं। ऐसे में पार्टी अपने उम्मीदवारों का वोट सपा प्रत्याशियों को ट्रांसफर कर देती है, तो इससे भाजपा की मुश्किलें बढ़ जाएंगी। कांग्रेस के लिए इस वक्त संगठन के मजबूत करने के बजाए भाजपा को हराना ज्यादा अहमियत रखता है। इसलिए, पार्टी को इस पर विचार करना चाहिए। कांग्रेस ने फूलपुर से मनीष मिश्रा और गोरखपुर से डॉ. सुरहिता करीम को उम्मीदवार बनाया है। पार्टी रणनीतिकार मानते हैं कि गोरखपुर में मुस्लिम उम्मीदवार के चलते मुस्लिम वोट बिखर सकता है। इसका सीधा फायदा भाजपा को होगा। ठीक इसी तरह फूलपुर में निर्दलीय अतीक अहमद के चुनाव लड़ने से मुकाबला दिलचस्प हो गया है। अतीक मुस्लिम वोट में सेंध लगाते हैं, तो भी इसका फायदा भाजपा को मिलेगा। लेकिन, कांग्रेस साथ आ जाती है तो भाजपा विरोधी वोट एकजुट हो जाएगा। भाजपा के लिए जीत आसान नहीं होगी।

पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि कांग्रेस के लिए इन दोनों उपचुनावों में उम्मीदवार घोषित करना जरूरी नहीं था। पार्टी को पहले ही इन दोनों सीट पर सपा के समर्थन का ऐलान कर देना चाहिए था। क्योंकि, 2014 के लोकसभा चुनाव में गोरखपुर और फूलपुर सीट पर समाजवादी पार्टी दूसरे नंबर पर रही थी। इससे कांग्रेस के 2019 के महागठबंधन की राह मजबूत होती। 

 

इलाहाबाद। यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में उनके कैबिनेट मंत्री नंद कुमार नंदी ने फूलपुर की चुनावी रैली में नई रामायण सुना डाली। नंदी ने कहा कि मुलायम सिंह यादव रावण थे और मायावती शूर्पनखा थीं। भगवान श्रीराम ने दोनों को कलयुग में मुख्यमंत्री बनने का वरदान दिया था।


नंदी यहीं नहीं रुके। उन्होंने यह भी कह डाला कि उसी समय भगवान राम ने शूर्पनखा को कह दिया था कि कलयुग में तुम अयोध्या पर राज करोगी, पर तुम्हारी शादी उस समय भी नहीं हो पाएगी। नंदी ने अखिलेश को मेघनाथ और शिवपाल को कुंभकर्ण बताया। नंदी ने कहा कि श्रीराम ने कुंभकर्ण को कहा था कि तुम्हें लोग शिवपाल के नाम से जानेंगे और तुम राज्यमंत्री के राज्यमंत्री ही रह जाओगे। 

नंदी ने कहा कि श्रीराम ने मेघनाथ को कहा था कि तुम एकबार लोगों को मूर्ख बनाकर 2012 में मुख्यमंत्री बन जाओगे, पर तुम इस वंश के आखिरी शासक होंगे। सीएम की मौजूदगी में दिए गए मंत्री नंदी के इस विवादित भाषण के बाद अब विवाद शुरू हो गया है

भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने 59वें जन्मदिन के मौके पर…

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने त्रिपुरा समेत तीन पूर्वोत्तर राज्यों में भाजपा की ऐतिहासिक सफलता पर खुशी जाहिर करते हुए तंज किया कि राहुल गांधी के अध्यक्ष बनने के बाद कांग्रेस पार्टी पांच राज्यों में चुनाव हार चुकी है तथा उनका यह रिकॉर्ड और तेजी के साथ आगे बढ़ेगा। योगी ने यहां प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि देश के पूर्वोत्तर राज्यों त्रिपुरा, नगालैंड और मेघालय में भाजपा और उसके गठबंधन को जो ऐतिहासिक सफलता मिली है उसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और पूर्वोत्तर के उन तमाम कार्यकर्ताओं को बधाई, जिन्होंने विषम परिस्थितियों में इन पूर्वोत्तर राज्यों में कमल खिलाने में कामयाबी हासिल की।

 

उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पर करारा प्रहार करते हुए कहा "राहुल अध्यक्ष बनने के बाद पांच राज्यों में चुनाव हार चुके हैं उनका यह रिकॉर्ड और तेजी के साथ आगे बढ़ेगा।"  योगी ने गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा उपचुनाव में मायावती की अगुवाई वाली बसपा द्वारा सपा को समर्थन दिए जाने की प्रबल संभावनाओं के बारे में पूछे जाने पर कहा कि केले और बेर का कोई मेल नहीं होता।

 

उन्होंने सपा का नाम लिए बगैर बसपा की दुखती रग पर हाथ रखते हुए कहा "यह किसी से छुपा नहीं है कि गेस्ट हाउस कांड किसने किया और स्मारकों को और मायावती सरकार द्वारा बनवाए गए स्मारकों को ध्वस्त करने की चेतावनी कौन लोग दे रहे थे।"  मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्वोत्तर राज्यों में भाजपा की जीत के बहुत मायने हैं। प्रधानमंत्री ने विकास और सुशासन को अपना एजेंडा शुरू से ही बनाया और अरसे से विकास के मामले में उपेक्षित पूर्वी भारत को भी विकास की प्रक्रिया की तरफ मोड़ा। उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर राज्यों के चुनाव परिणाम राष्ट्रीय अखंडता के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है। इस जीत ने एहसास कराया है कि जाति, मत और मजहब के आधार पर समाज को बांट कर कोई भी व्यक्ति सार्वजनिक जीवन में बहुत दिन तक टिक नहीं सकता।

 

योगी ने कहा कि इतिहास में पहली बार वामपंथ के किसी गढ़ को भाजपा कार्यकर्ताओं ने ध्वस्त कर वहां विकास के रंग यानी केसरिया को आच्छादित कर दिया है। उन्होंने विश्वास जताया कि पूर्वोत्तर में मिली चुनावी सफलता का प्रभाव कर्नाटक केरल पश्चिम बंगाल और उड़ीसा के आगामी विधानसभा चुनाव पर भी पड़ेगा और भाजपा के विकास तथा सुशासन के लक्ष्य को आगे करते हुए प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के कुशल रणनीति के तहत पार्टी इन राज्यों में भी पार्टी विजय पताका फहराएगी।

 

दूर तक जाएगा पूर्वोत्तर की जीत का संदेश: योगी

 

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने त्रिपुरा समेत तीन पूर्वोत्तर राज्यों के विधानसभा चुनाव में भाजपा की ऐतिहासिक सफलता पर खुशी जाहिर करते हुए इसे कर्नाटक, केरल, पश्चिम बंगाल और उड़ीसा के आगामी चुनावों पर असर डालने वाला करार दिया। योगी ने यहां प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि देश के पूर्वोत्तर राज्यों त्रिपुरा, नगालैंड और मेघालय में भाजपा और उसके गठबंधन को जो ऐतिहासिक सफलता मिली है उसका पूरा श्रेय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और पूर्वोत्तर के उन कार्यकर्ताओं को जाता है, जिन्होंने विषम परिस्थितियों में पूर्वोत्तर में कमल खिलाने में कामयाबी हासिल की।

 

उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर के चुनावी नतीजों का असर कर्नाटक, केरल, पश्चिम बंगाल और उड़ीसा के विधानसभा चुनावों पर भी पड़ेगा। हम विश्वास के साथ कह सकते हैं कि भाजपा इन राज्यों में भी विकास और सुशासन के लक्ष्य को आगे करते हुए प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह की कुशल रणनीति के तहत विजय पताका फहरायेगी।

 

त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में भाजपा के स्टार प्रचारक रहे मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2013 में इस राज्य के चुनाव में भाजपा को एक प्रतिशत के आसपास वोट मिले थे और उसके पास एक भी सीट नहीं थी। आज भाजपा 59 में से 35 सीटें जीत चुकी है। इतिहास में पहली बार है, जब वामपंथ के किसी गढ़ को भाजपा कार्यकर्ताओं ने ध्वस्त कर वहां विकास के रंग यानी केसरिया को आच्छादित कर दिया है।

रीबा :मध्य प्रदेश में लगातार पिछले तीन विधानसभा चुनाव जीतकर सत्ता संभालने वाली भारतीय जनता…

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