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बिहार के मंत्री के घर में हुई शराब की दावत.

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Madhay Pradesh (28)

रीबा: त्योथर के जाने माने कांग्रेसी नेता कौशलेश द्विवेदी म.प्र.कांग्रेस कमेटी के सचिव बने.समर्थको मे उत्साह

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दिल्ली से कोलकाता तक टीएमसी का प्रोटेस्ट

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नई दिल्ली : नोटबंदी पर केंद्र सरकार को घेरने में जुटी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्र ...

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छत्तीसगढ़ में पुलिस के हाथ बड़ी सफलता लगी है। शुक्रवार सुबह होली के दिन यहां…

लखनऊ। गोरखपुर लोकसभा उपचुनाव के भाजपा प्रत्याशी उम्मीदवार उपेंद्र शुक्ला के मस्तिष्क में ब्लड क्लॉटिंग हो गई है। इसके चलते लखनऊ पीजीआई में उन्हें भर्ती कराया गया है। उनकी हालत गंभीर बताई जा रही थी।


लेकिन बृहस्पतिवार को हुए ऑपरेशन के बाद उनकी हालत में सुधार बताया जा रहा है। डॉक्टर के अनुसार, उनका ऑपरेशन सफल रहा है और वह खतरे से बाहर हैं

ब्रेन हेमरेज की शिकायत के बाद हुए भर्ती
RSS के बेहद करीबी माने जाने वाले गोरखपुर से भाजपा प्रत्याशी उपेंद्र शुक्ल को गुरुवार सुबह ब्रेन हेमरेज की शिकायत हुई, जिसके बाद उन्हें लखनऊ के संजय गांधी पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टिट्यूट में भर्ती किया गया। पीजीआई के डॉक्टरों के अनुसार, उपेंद्र का ऑपरेशन सफल हुआ है। उन्हें ब्रेन में क्लॉटिंग की समस्या थी, जिसके बाद न्यूरोलॉजी विभाग में ऑपरेशन किया गया है। उनका ऑपरेशन सफल रहा है और अब खतरे से बाहर हैं। हालांकि उन्हें अब भी आराम की जरूरत है।
 भाजपा के क्षेत्रीय अध्यक्ष उपेंद्र दत्त शुक्ल काफी लंबे समय से पार्टी और जनता के बीच सक्रिय हैं। आने वाली गोरखपुर लोकसभा सीट के चुनाव के लिए उन्हें प्रत्याशी घोषित किया गया है। गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा सीट के चुनाव के लिए मतदान 11 मार्च को होगा। चुनाव के परिणाम की घोषणा 14 मार्च को की जाएगी। 
गोरखपुर सीट मुख्यमंत्री आदित्यनाथ और फूलपुर सीट उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के बाद खाली हुई है। ऐसे में भाजपा के क्षेत्रीय अध्यक्ष उपेंद्र दत्त शुक्ला का बीमार होना भाजपा की सेहत के लिए काफी खराब माना जा सकता है।

 

 

 

जहानाबाद। क्या शराबबंदी को लेकर नीतीश की सारी कोशिशें धराशाही हो गई है। क्या नीतीश…

भोपाल। 15 साल से प्रदेश की सत्ता पर काबिज भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को बुधवार को आए दो विधानसभा क्षेत्रों के उप-चुनावों के परिणामों से झटका लगा है। तमाम कोशिशों के बावजूद भाजपा के हाथों से ये दोनों सीटें निकल गईं। यहां मुकाबला शिवराज सरकार बनाम कांग्रेस सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीच हो गया था। चुनाव नतीजों से यह संकेत मिल रहा है कि प्रदेश में भाजपा के लिए पहले जैसा अनुकूल माहौल नहीं रहा है। वहीं, चुनाव परिणाम जनता के मूड में बदलाव की ओर भी इशारा कर रहे हैं। राज्य में इस साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले शिवपुरी के कोलारस और अशोकनगर के मुंगावली विधानसभा क्षेत्रों के उप-चुनाव काफी अहम माने जा रहे थे। सत्ताधारी पार्टी और सरकार ने चुनाव जीतने के अपने प्रयास में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी थी।


वहीं, कांग्रेस की कमान युवा सांसद सिंधिया के हाथ में थी। उन्हें चुनाव प्रचार अभियान में पूर्व केंद्रीय मंत्री कमलनाथ, प्रदेशाध्यक्ष अरुण यादव, नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह, प्रदेश प्रभारी दीपक बाबरिया और सहरिया जनजाति में गहरी पैठ रखने वाले मनीष राजपूत का भरपूर साथ मिला। चुनाव नतीजों पर बुद्धिजीवी साजी थॉमस ने कहा, ये उप-चुनाव हर दृष्टि से प्रदेश सरकार के लिए अहम थे, क्योंकि पिछले दिनों मंदसौर में किसानों पर गोली चलने की घटना के बाद से जगह-जगह किसान आंदोलन और कर्मचारी वर्गो के आंदोलन चल रहे हैं। वहीं, केंद्र सरकार की ओर से नोटबंदी और जीएसटी लागू करने को लेकर लोगों में जो नाराजगी है, उसमें अगर अगर भाजपा जीत हासिल करती तो यह माना जाता कि शिवराज का करिश्मा अब तक बरकारार है, मगर ऐसा नहीं हुआ।

उन्होंने कहा कि उप-चुनाव के नतीजों से भाजपा और सरकार को यह इशारा जरूर मिला है कि आने वाला समय उनके लिए बहुत अच्छा नहीं है। यह बात सही है कि, यह दोनों विधानसभा क्षेत्र कांग्रेस के कब्जे वाले रहे हैं, साथ ही यह सांसद सिंधिया के संसदीय क्षेत्र के अधीन आते हैं। उसके बावजूद राज्य के मुख्यमंत्री चौहान और संगठन ने जीत के लिए किसी तरह की कमी नहीं छोड़ी। लगभग पूरा मंत्रिमंडल और संगठन के पदाधिकारी कई-कई दिन तक यहां डेरा डाले रहे। वहीं सिंधिया के करीबी और सांसद प्रतिनिधि के. पी. यादव को भाजपा में शामिल कराकर सिंधिया को बड़ा झटका दिया था। मुख्यमंत्री चौहान ने लगभग हर सभा और जनसंपर्क के दौरान दोनों जगहों के मतदाताओं से पांच माह के लिए भाजपा का विधायक मांगा और वादा पूरे न करने पर अगले चुनाव में नकार देने तक की बात कही, मगर जनता का उन्हें साथ नहीं मिला।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस हार को स्वीकारते हुए कहा है कि, यह दोनों क्षेत्र कांग्रेस के थे। यहां आम चुनाव में कांग्रेस बड़े अंतर से जीती थी। उसके बाद भी भाजपा के कार्यकर्ताओं ने काफी मेहनत की और मुकाबले को बनाए रखा। भाजपा बहुत कम अंतर से हारी है। वहीं कांग्रेस नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह और प्रदेशाध्यक्ष अरुण यादव का कहना है कि, भाजपा आगामी चुनाव में 200 पार का नारा दे रही है और दो विधानसभा चुनाव को तो पार कर नहीं पाई है। यह चुनाव कांग्रेस और भाजपा के खिलाफ पनपते आक्रोश की जीत है। इस जीत में सांसद सिंधिया और कार्यकर्ताओं की मेहनत का बड़ा योगदान रहा है। इन चुनाव के नतीजों से शिवराज सरकार की विदाई का क्रम शुरू हो गया है।

राजनीति के जानकारों की मानें तो इन नतीजों से सरकार की सेहत पर कोई फर्क नहीं पडऩे वाला, मगर कांग्रेस में उत्साह का संचार जरूर होगा। वहीं भाजपा को अपनी कार्यशैली और रणनीति पर विचार करने को मजबूर होना पड़ेगा। ऐसा इसलिए क्योंकि भाजपा ने दोनों चुनाव जीतने के लिए हर दाव पेंच लगाए। पहले आदिवासियों को प्रतिमाह 1000 रुपये देने का ऐलान किया। उसके बाद जाति के आधार पर तीन मंत्री बनाए गए। यह सारी कोशिशें बेकार नजर आ रही हैं। आगामी चुनाव के लिए शिवराज और उनकी सरकार को मास्टर स्ट्रोक की तलाश रहेगी। विधानसभा के दो उप-चुनाव की जीत कांग्रेस में नया उत्साह तो भरेगी ही, क्योंकि उसे इस जीत से वह खुराक भी मिल गई है, जिसकी उसे दरकार थी। आम चुनाव कुछ माह बाद हैं, दूसरी ओर कई वर्गों में सरकार के खिलाफ असंतोष पनप रहा है। इन स्थितियों का भाजपा और शिवराज कैसे मुकाबला करेंगे, यह यक्ष प्रश्न बना हुआ है। 

इलाहाबाद। फूलपुर उपचुनाव के कांग्रेस प्रत्याशी के लिए प्रचार करने आए राष्ट्रीय कार्यसमिति के सदस्य और पूर्व केंद्रीय मंत्री अनिल शास्त्री ने राहुल गांधी को बदलाव का सुझाव देते हुए बड़ा बयान दिया है। पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के बेटे अनिल शास्त्री ने कहा है कि अगर राहुल गांधी ने अपनी टीम में बदलाव कर नये चेहरों को मौका नहीं दिया तो पार्टी को हार का सामना करना पड़ सकता है।


उन्होंने कहा कि न्यू कांग्रेस की परिकल्पना पर काम नहीं किया तो 2019 के आम चुनाव में भी कांग्रेस पार्टी को पिछले चुनाव की तरह ही करारी हार का सामना करना पड़ेगा। पूर्व मंत्री ने कहा कि राहुल गांधी को अपनी टीम में न सिर्फ बड़ा बदलाव करना होगा, बल्कि साथ ही प्रियंका गांधी को राजनीति में सक्रिय कर उन्हें अहम ज़िम्मेदारी सौंपने पर भी गंभीरता से विचार करना होगा। 

अनिल शास्त्री के मुताबिक़ सिर्फ अध्यक्ष बदल जाने से ही कांग्रेस का कुछ भला नहीं होने वाला है। बल्कि आज कांग्रेस को पीएम मोदी के न्यू इंडिया से सबक लेते हुए न्यू कांग्रेस के विजन पर काम करना होगा। अगर राहुल गांधी ने न्यू कांग्रेस के विजन पर काम नहीं किया तो पुराने ढर्रे वाली कांग्रेस को कुछ भी हासिल होने वाला नहीं है और अंजाम 2014 के आम चुनावों जैसा ही होगा। 

इलाहाबाद में कांग्रेस उम्मीदवार मनीष मिश्र के प्रचार में आए अनिल शास्त्री ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि कांग्रेस में इस वक्त राष्ट्रीय स्तर से निचले स्तर तक संगठन में बदलाव की ज़रूरत है। सिर्फ अध्यक्ष बदल जाने से कुछ भी हासिल होने वाला नहीं है। इस बारे में निवर्तमान अध्यक्ष सोनिया गांधी भी पार्टी की बैठक में बोल चुकी हैं।

उनके मुताबिक़ कांग्रेस कार्यकर्ता जिस तरह से राहुल गांधी को पार्टी अध्यक्ष बनाए जाने की मांग कर रहे थे उसी तरह उनकी मांग प्रियंका को भी राजनीति में सक्रिय करने की है। प्रियंका को सक्रिय करने की मांग पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पर कोई फैसला करना चाहिए।  

सचिन श्रीवास्तव नवी मुंबई : साढ़े बारह टक्का के अंतर्गत भूखंड आवंटित मामले में जानकारी नही दिए जाने के मामले में सिडको के जन सूचना अधिकारी सुनील तांबे को राज्य सूचना आयुक्त द्वारा सजा सुनाई गई है। शिकायतकर्ता ने माहिती अधिकार के तहत इस मामले की जानकारी मांगी थी लेकिन पिछले दो सालों से इस मामले की जानकारी देने से अधिकारी आनाकानी कर रहे थे । इस मामले की शिकायत के बाद सुनवाई के दौरान भी उक्त अधिकारी अनुपस्थित रहने के अलावा नियमों को अनदेखा कर रहा था इसलिए उसके खिलाफ यह कार्रवाई की गई है।

करावे में सम्राट रामचंद्र पाटिल की मां के नाम पर मिलने वाले साढ़े बारह प्रतिशत भूखंड को अलग-अलग लोगों को नाम पर वितरित किया गया था। इस प्रकार से करोड़ो रूपए की जमीन हड़पने का प्रयास किया गया। इसलिए उन्होंने इस मामले को सिडको अधिकारियों के सामने लाने की कोशिश किया। इसलिए 2016 में उन्होंने सूचना के अधिकार अधिनियम द्वारा सिडको से भूमि आवंटन के बारे में जानकारी मांगी थी। इसके बाद संबंधित अधिकारी जानकारी देने से टालमटोल कर रहे थे। इसलिए सम्राट पाटिल ने राज्य सूचना आयुक्त के कोंकण खंडपीठ के पास सिडको अधिकारी सुनील तांबे के खिलाफ शिकायत की। तदनुसार 8 जनवरी को सूचना आयुक्त के कार्यालय में सुनवाई के दौरान तांबे ने जानकारी को नही देने का कारण बताया था। कोंकण बेंच ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया है | इसके अलावा 25 हजार रुपये का जुर्माना भी सुनाया गया। दंड की यह राशि उनके वेतन से वसूल किया जाएगा ।शिकायतकर्ता सम्राट पाटिल ने माहिती अधिकार आयुक्त द्वारा की गई कार्रवाई पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि अभी भी सिडको से न्याय मिलने की उम्मीद है । मूल धारक को मिलने वाला साढ़े बारह प्रतिशत भूखंड वितरण में धांधली हुई है जिस पर पर्दा डालने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री के पास शिकायत करने पर कार्यवाई किए जाने का निर्देश जारी करने के बाद भी सिडको इस मामले को संज्ञान में नहीं ले रही थी। सिडको के साढ़े बारह प्रतिशत योजना विभाग इस तरह से कई शिकायतें हैं। ऐसे मामलों मे सुनील तांबे की सतर्कता विभाग द्वारा सुनियोजित जांच शुरू थी | कई सालों तक वह इस विभाग में मजबूती से बैठे थे। तदनुसार जांच के बाद की दो महीने पहले उनका साढ़े बारह टक्का विभाग में तबादला कर दिया गया। हालांकि इस मामले का खुलाशा होने से अब यही सवाल उठाया जा रहा है कि सिडको में हेराफेरी बदस्तूर जारी है | 

 

 

लखनऊ। उत्तर प्रदेश शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष सैयद वसीम रिजवी ने देश में मंदिर तोड़कर बनाई गई नौ मस्जिदों को हिदुओं को वापस करने की मांग की है। यह मांग ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड से की गई है। वसीम रिजवी ने इसके लिए बोर्ड के अध्यक्ष को पत्र लिखकर कहा कि इस्लाम में किसी इबादतगाह को जबरन तोड़कर मस्जिद बनाया जाना जायज नहीं है।

वसीम रिजवी ने लिखा है कि दूसरे इबादतगाह तोड़कर बनाई गई मस्जिदों में किसी भी तरह की अल्लाह की इबादत जायज नहीं है। इसलिए ऐसी मस्जिदें हिदू समाज को सौंप दी जाएं। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड यदि ऐसा करेगा तो इस्लाम का असली मकसद दुनिया के सामने पेश हो सकेगा। उन्होंने कहा कि मेरा नौ मस्जिदों को हिदू समाज को सौंपने का जो प्रस्ताव है उसे ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की आगामी बैठक के आम जलसे में रखा जाए।

उन्होंने कहा कि इतिहासकारों ने अध्ययन करके नौ मस्जिदों के बारे में बताया है कि इन्हें मुगलों व उनसे पहले आए सुल्तानों ने मंदिरों को तोड़कर बनाया है। इन मस्जिदों को हिदुओं को वापस देने के लिए बोर्ड में आम राय बनाई जाए। उन्होंने बोर्ड को एनजीओ की संज्ञा देते हुए कहा कि कुछ कट्टरपंथी लोग इस प्रस्ताव पर विचार ही नहीं करेंगे, लेकिन इस्लाम यह सीख देता है कि चाहे जालिम की ही पंचायत क्यों न हो अपनी हक की बात उनके सामने जरूर रखनी चाहिए।

इन इबादतगाहों को हिंदुओं को सौंपने की वकालत

1-राम मंदिर, अयोध्या

2-केशव देव मंदिर, मथुरा

3-अटाला देव मंदिर, जौनपुर

4-काशी विश्वनाथ मंदिर, वाराणसी

5-रुद्र महालय मंदिर, बटना, गुजरात

6-भद्रकाली मंदिर, अहमदाबाद, गुजरात

7-अदीना मस्जिद, पंडुवा, पश्चिम बंगाल

8-विजय मंदिर, विदिशा, मध्य प्रदेश

9-मस्जिद कुव्वत-उल-इस्लाम, कुतुबमीनार, दिल्ली

वसीम रिजवी पर भड़के देवबंदी उलमा

वसीम रिजवी के बयान पर देवबंदी उलमा ने आरोप लगाया कि वसीम रिजवी भाजपा को खुश करने और अपने सियासी वजूद को बनाने के लिए इस तरह की हरकतें कर रहे हैं। दारुल उलूम निसवा के मोहतमिम मौलाना अब्दुल लतीफ कासमी ने कहा कि सुर्खियों में बने रहने के लिए रिजवी इस तरह के शिगूफे छोड़ते रहते हैं। इस्लामी विद्वान मुफ्ती अथर कासमी ने कहा कि बेशक कब्जा की गई जगह पर मस्जिद नहीं बनाई जा सकती और ना ही वहां नमाज हो सकती है, लेकिन रिजवी अपने दावे को साबित तो करें कि उक्त मस्जिदों को जमीन कब्जा कर बनाया गया है।

भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा में राज्य के वित्तमंत्री जयंत मलैया आज वर्ष 2018-19 का दो…

इलाहाबाद /मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर लोकसभा उपचुनाव में जनता से भाजपा के लिए वोट करने की अपील की। मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले प्रदेश में जनता के पैसों का बंदरबांट होता था, अपराध होते थे, मिलें बिकती थीं, पर भाजपा सरकार में ऐसा कोई नहीं कर सकता है। 

योगी ने कहा कि प्रदेश में अनेक सरकारों की कार्य पद्धति को देखा है, लेकिन इस तरह का काम पहले नहीं देखा होगा। सरकार ने 11 महीनों में किसानों का कर्ज माफ कर दिया और 11 लाख गरीबों को प्रधानमंत्री आवास उपलब्ध करा दिया। योगी ने कहा कि 37 लाख गरीबों को शौचालय उपलब्ध कराए गए। जहां पहले बिजली नहीं थी, आज उन शहरों और गांवों को बिजली मिल रही है, क्योंकि भाजपा ने विकास को परिवार, जाति या क्षेत्र में नहीं बांटा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कार्यकर्ताओं ने हमें पांच चुनाव जिताए और जीत के आंकड़े हर चुनाव में बढ़ते गए, क्योंकि उनके चुनाव में कार्यकर्ता सब कुछ देखते थे। इसलिए उन्हें किसी से बात करने की आवश्यकता नहीं पड़ती थी। हर कार्यकर्ता चुनाव जीतने के लिए तन्मयता से लगता था। कार्यकर्ताओं से अपील करते हुए कहा कि जैसे उनके लिए कार्यकर्ता काम में जुटते थे, उसी तरह से उपेंद्र शुक्ल को जिताने के जिए जुटिए। 2019 में प्रदेश की सभी 80 लोकसभा सीटें जीतकर मोदी को देना है।

उन्होंने कहा कि पहले जनता के रुपयों का बंदरबाट होता था, अपराध होते थे, मिलें बिकती थीं, पर अब ऐसा कोई नहीं कर सकता। आज गोरखपुर को एम्स, खाद कारखाना, पॉलीटेक्निक, अस्पताल, मिल, पुल सहित तमाम चीजें मिल रही हैं।

इलाहाबाद/योगी सरकार के कैबिनेट मंत्री नंद गोपाल नंदी एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं। स्टॉम्प और नागरिक उड्डयन मंत्री नंद गोपाल नंदी पर अपने सरकारी ड्राइवर के साथ गाली गलौज और मारपीट करने का आरोप लगा है।


ड्राइवर अर्जुन सिंह ने बताया कि इलाहाबाद में आचार संहिता लगी हुई है, जिसमें मंत्री जी मुझे जबरदस्ती सरकारी गाड़ी ले जाने का दबाव बना रहे थे। ड्राइवर ने बताया कि जब उन्होंने जाने से मना किया तो ऑफिस का कर्मचारी मंत्री से जाकर पूरी बात बताई। जिस पर मंत्री जी नाराज हो गए। मंत्री ने दी गालियां और फिर पीटा
ड्राइवर ने आरोप लगाया कि गाड़ी नहीं ले जाने की बात सुनकर मंत्री नंदगोपाल नंदी अपना आपा खो बैठे। मारपीट के इरादे से गाली देते हुए ऑफिस से बाहर निकले और उसकी पिटाई कर दी। ड्राइवर ने बताया कि मौके की नजाकत देखते हुए वह किसी तरह वहां से भाग निकला। 
 

साथी ड्राइवरों को बताई आपबीती
घटना के बाद पीड़ित ड्राइवर अर्जुन सिंह ने राज्य संपत्ति ऑफिस पहुंचकर अपने साथी कर्मचारियों और ड्राइवरों को आपबीती सुनाई। जिससे नाराज कर्मचारी संघ मंत्री के आवास की तरफ कूच कर गया। आवास पर मंत्री के न मिलने पर बाहर ही जोरदार प्रदर्शन शुरू हो गया। 

ड्राइवरों ने मंत्री के वहिष्कार की घोषणा की
कर्मचारी संघ के महामंत्री घनश्याम शुक्ला ने कहा कि मंत्री इससे पहले भी कई चालकों से अभद्र व्यवहार कर चुके हैं और आज की घटना के बाद अब कोई भी मंत्री नंदी की गाड़ी नहीं चलाएगा। साथ ही संघ ने एलान किया है वो कल सुबह कर्मचारी संघ में मंत्री के खिलाफ कार्रवाई को लेकर बैठक करेंगे। उन्होंने कहा कि यदि मंत्री के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती है तो वो आन्दोलन के लिए बाध्य होंगे।

बढ़ी मंत्री नंदगोपाल की मुश्किलें
गौरतलब है कि इससे पहले भी मंत्री नंदी अपने विवादों के चलते सुर्खियों में रह चुके हैं। इस बार की घटना के बाद मंत्री की मुश्किलें बढ़ती दिखाई दे रही है। कर्मचारी संघ इस मामले में अब सीएम योगी से मिलकर मंत्री के खिलाफ कार्रवाई की मांग करेगा।


मंत्री ने दी सफाई
मामले में सफाई देते हुए कैबिनेट मंत्री नंद गोपाल नंदी ने कहा कि चालक ने नाटकीय ढंग से मारपीट का आरोप लगाया है। उन्होंने बताया कि चालक पिछले काफी समय से अनियमितता में संलिप्त रहा है। गाड़ी से तेल निकाल कर भेज देना, ड्यूटी के दौरान देर से आना जैसी शिकायतों पर उसके खिलाफ कार्रवाई के लिए लिखा जा रहा था तभी उसने एक सुनियोजित साजिश के तहत मारपीट का आरोप लगाया है।

उन्होंने बताया कि जैसे ही वह अपने दोस्त की गाड़ी लेकर इलाहाबाद जाने के लिए रवाना हुए वैसे ही 5 मिनट के अंदर प्लानिंग के तहत उनके खिलाफ मारपीट के आरोप भी लगाए गए और घर के बाहर धरना प्रदर्शन भी किया गया। उनके ऊपर इस तरह के बेबुनियाद आरोप लगाए गए जा रहे हैं। 

 

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