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Health (4)

 

 

 

अक्सर एसिडिटी होने पर लोग एंटासिड या एसिडिटी की महंगी दवाओं की तरफ भागते हैं। एम्स भोपाल के आयुष विभाग के डॉ. अजय सिंह बघेलका कहना है कि एसिडिटी का असली कारण खान-पान की गलत आदतें है। अगर इन आदतों में बदलाव लाया जाए तो एसिडिटी से हमेशा के लिए छुटकारा पाया जा सकता है। आइए जानते हैं कौन सी वह 8 आदतें हैं जिनमें बदलाव लाकर एसिडिटी से हमेशा के लिए छुटकारा पाया जा सकता है।

 

बदलाव 1 – खाने के बीच में 3-4 घंटे से ज्यादा का गैप न करे

 

 

कारण – खाना पचने में 3-4 घंटे लगते है उसके बाद पेट में अपने आप एसिड बनना शुरू हो जाता है

 

बदलाव 2 – रोज निर्धारित समय पर ही खाए

 

कारण – ब्रेन और पेट की मेमोरी में खाने का समय दर्ज रहता है, समय होने पर बॉडी से डाइजेस्टव एसिड रिलीज होने लगते है

 

बदलाव 3 – खाना धीरे – धीरे और अच्छी तरह चबाकर खाए

 

कारण – खाना अच्छे से न चबाने से खाने के बड़े टुकड़े डाइजेस्ट करने के लिए पेट ज्यादा एसिड रिलीज करता है

 

बदलाव 4 – अपनी फूड हेबिट में बदलाव करे

 

क्या करे – स्पाइसी, ऑयली, फ़ास्ट फूड के बजाय ज्यादा फाइबर, नट्स, हरी सब्जियां, बीन्स वगेरा खाए

 

बदलाव 5 – अल्कलाइन फूड्स की मात्रा बढाए

 

कारण – अल्कलाइन फूड एसिडिटी को न्यूट्रल करते है सोडे वाला नींबू पानी, सलाद, गाजर, खीरा खाए. पानी ज्यादा पिए

 

बदलाव 6 – एंटीबायोटिक्स या गर्म दवाओ का सेवन कम करके आयुर्वेद या होम्योपैथिक दवा ले

 

कारण – कई दवाओ के साइड इफ़ेक्ट से एसिडिटी हो सकती है.

 

बदलाव 7 – सोने से 3-4 घंटे पहले डिनर कर ले.

 

कारण – सोते समय डाइजेशन की प्रोसेस स्लो हो जाती है. खाना खाकर तुरंत सोने से एसिडिटी की प्रॉब्लम बढती है

 

बदलाव 8 – वॉक, एक्सरसाइज या योग करे.

 

कारण – फिजिकल एक्टिविटी न होने से डाइजेशन प्रॉपर नहीं होता और एसिडिटी बढ़ जाती है. रोज आधे घंटे की वॉक या एक्सरसाइज जरुरी है

 

आगे जानिए एसिडिटी से राहत की होम रेमेडी >>

 

लौंग – लौंग चबाएं या लौंग उबालकर उसका पानी पिए. ये गैस और एसिडिटी से राहत दिलाती है.

 

ठंडा दूध – ठंडा दूध पेट में जाकर एसिड को न्यूट्रीलाइट करता है. पेट को ठंडक पहुचाता है.

 

नींबू, खाने का सोडा – एक गिलास ठन्डे पानी में एक चमच नींबू का रस घोले और उसमे आधा चम्मच बेकिंग सोडा डालकर तुरंत पी लें.

 

केला – केले की अल्कलाइनप्रॉपर्टी पेट के एसिड को न्यूट्रीलाइट करती है ओर एसिडिटी और खट्टी डकार से राहत दिलाती है

 

अदरक – जलन होने पर एक टुकड़ा अदरक चबाएं, एक चम्मच शहद में अदरक का रस मिलाकर भी ले सकते है.

 

 

 

नई दिल्ली (16 दिसंबर): तेज चलना, तैराकी, डांस और जॉगिंग जैसी शारीरिक गतिविधियां न केवल सेहत को बेहतर बनाती हैं, बल्कि ये बुजुर्गों में भी दिमाग की क्षमता बढ़ाकर याद्दाश्त को तेज कर देती हैं।

एक रिसर्च से पता चला है कि उम्र बढ़ने पर स्मृति और दिमाग की गतिविधियों में बदलाव ज्यादातर इंसान के शारीरिक स्वास्थ्य स्तर पर निर्भर करता है।

 

 

रिसर्च के दौरान पता चला कि जिन प्रतिभागियों का फिटनेस स्तर कम रहा, उनकी तुलना में व्यायाम करने वाले प्रतिभागियों के हृदय का फिटनेस स्तर बेहतर मिला, जिससे उनकी स्मरण शक्ति और मस्तिष्क की गतिविधियों में भी सुधार हुआ।

 

 

उम्र की परवाह किए बिना व्यायाम केवल शारीरिक सेहत ही नहीं, बल्कि स्मरण शक्ति और दिमाग की क्षमता को बेहतर करने में भी योगदान करता है।स्कॉट हेयस, सहायक प्राध्यापक, बोस्टन यूनिवर्सिटी, अमेरिका इस रिसर्च के लिए 18 से 31 साल के स्वस्थ युवा और 55 से 74 साल के बुजुर्गों को चुना गया था।

 

 

 प्रतिभागियों द्वारा ट्रेडमिल पर चलने और जॉगिंग करने के दौरान रिसर्च करने वालों ने उनका कार्डियोरेस्पिरेटरी फिटनेस (सीआरएफ) का आकलन किया।

 

 

कार्डियोरेस्पिरेटरी फिटनेस की टेस्टिंग में अच्छा प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों ने अन्य प्रतिभागियों की तुलना में स्मृति संबंधी कामों में बेहतर परिणाम दिया। यह रिसर्च 'कॉर्टेक्स' पत्रिका में प्रकाशित हुआ है। 

नई दिल्ली: हर साल '26 दिसंबर' का दिन दिल के मरीजों के लिए काफी खतरनाक होता है। इस दिन दिल के दौरे, अरहाइथमाइस, अचानक कार्डिएक अरेस्ट यानी दिल फेल हो जाने के मामले ज्यादा देखे जाते हैं।

 

एक ताजा शोध में यह बात सामने आई है कि दिल के मरीजों में 26 दिसंबर को समस्याएं अचानक बढ़ जाती हैं। यह भी पता चला है कि क्रिसमिस के चार दिनों के बाद दिल फेल होने के मामले 33 फीसदी बढ़ जाते हैं।


शोध में पता चला है कि दिल के मरीजों में से पांच प्रतिशत की मौत छुट्टियों में हो जाती है। वे घर में रहते हैं और दिल के दौरे का उपचार करवाने में देरी कर देते हैं।



इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के मनोनीत अध्यक्ष पद्मश्री डॉ. के.के. अग्रवाल ने बताया कि सर्दियों और त्योहारों में ज्यादा मौज- मस्ती का सेहत पर नकारात्मक असर हो सकता है।

 

लोगों को इस बात के लिए जागरूक करना होगा कि वे सेहतमंद खुराक लें, नियमित कसरत करें और शराब से दूर रहें, क्योंकि ये दिल को स्वस्थ रखने के लिए जरूरी हैं।



उन्होंने कहा कि यह जरूरी है कि लोग ज्यादा ट्रांसफैट, मीठे और नमक का सेवन न करें और उनकी जगह ताजा फल और सब्जियों का सेवन कर सेहतमंद रहें।


डॉ. अग्रवाल ने बताया कि सर्दियां दिल के दौरे, दिल फेल होने और अरहाइथमाइस के मरीजों के लिए काफी खतरनाक होती हैं। ठंडा मौसम दिल पर भारी पड़ता है। ठंड के कारण रक्त धमनियां सिकुड़ जाती हैं और रक्तचाप बढ़ जाता है। रक्त भी जल्द जमने लगता है।

 

घटता तापमान दिल पर दबाव बढ़ा देता है और ज्यादा शारीरिक थकान से उस पर बोझ बढ़ जाता है, ऐसे में दिल का दौरा पड़ सकता है।

 

उन्होंने कहा कि क्रिसमस के दिनों में शराब ज्यादा पीने से एट्रियल फिब्रिलेशन होती है, जिसमें दिल की धड़कन अनियमित हो जाती है। अगर ऐसा लगातार होता रहे तो इसका अंत 'स्ट्रोक' के रूप में सामने आता है।


डॉ. अग्रवाल का कहना है कि क्रिसमिस के बाद लोग अक्सर सांस फूलने और सीने में दर्द जैसे दिल के दौरे के लक्षणों को बदहजमी समझ लेते हैं। अगर दिल का दौरा पड़े तो इलाज करवाने में 12 घंटे से ज्यादा देर नहीं करनी चाहिए।

नईदिल्ली: अब आ गया है ड्रग्स का ऐसा कोकटेल जो जड़ से खत्म करेगा कैंसर के सेल्स को. जी हां, एक नई रिसर्च के मुताबिक, डायबिटीज और हाइपरटेंशन की ड्रग्स के कॉम्बिनेशन से कैंसर को खत्म किया जा सकता है.

 

कौन सी हैं ये दवाएं-

अपने एक्सपेरिमेंट के दौरान शोधकर्ताओं ने पाया कि डायबिटीज ड्रग के सॉल्ट मेटफॉरमिन और एंटीहाइपरटेंसिव ड्रग साइरोसिंगोपाइन के कॉम्बिनेशन से कैंसर सेल्स को मारा जा सकता है. शोधकर्ताओं ने पाया कि कैंसर के सेल्स को प्रभावी तौर पर इन दो ड्रग्स का कॉम्बिनेशन खत्म कर सकता है.

 

क्या कहते हैं एक्सपर्ट-

स्विट्जरलैंड की बेसल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर और इस रिसर्च के प्रमुख शोधकर्ता डॉन बेंजामिन का कहना है कि रिसर्च के ये आंकड़े कैंसर के मरीजों का इलाज करने में मदद करेंगे.

 

डायबिटीज की दवा-

आपको बता दें, टाइप टू डायबिटीज के मरीजों के लिए मेटफॉरमिन हाई लेवल पर प्रिस्क्राइब की जाती है. इस ड्रग से शुगर लेवल तो कम होता ही है इसके साथ ही इसमें एंटी-कैंसर प्रोपर्टीज भी शामिल हैं. बहरहाल, अकेले ये ड्रग कैंसर से बहुत प्रभावी तरीके से फाइट नहीं कर पाती.

 

साइड इफेक्ट्स जाते हैं बढ़-

आपको बता दें, एंटीबायोटिक्स ड्रग्स की हाई डोज लेने से बेशक कैंसर सेल्स की ग्रोथ ना हो लेकिन इसके अन्वांटेड इफेक्ट्स जरूर होते हैं.

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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