You are here: Homeधर्म - कर्म

Religion (7)

आचार्य राज नाथ दुबे ,शारदीय नवरात्र से शुरू हो रहा है।नौ दिनी शारदीय नवरात्र कई मायने से अहम है। नवरात्र में मां दुर्गा के विविध रूपों की पूजा अर्चना के शुभ समय एवं विधानों का पालन करना भी जरूरी माना गया है। इन नौ दिनों में माता को मनाने के लिए खुद को बेटे के रूप में प्रस्तुत करना होगा। उनके लिए सलतम उपाय मां के लिए आदर के शब्द काफी माने गए हैं। माता के आगमन का वाहन
इस बार नवरात्र में माता के आगमन में वाहन को दो तरह से देखा जा रहा है। शास्त्रीय विधानों से माता के आगमन को प्राण प्रतिष्ठित मन्दिरों, शक्तिपीठों में नहीं देखा जाता, क्योंकि यहां तो माता की शक्ति अधिष्ठापित ही है। इसके अलावा घरों में स्थापित होने वाली पूजा में भी मां के आगमन या वाहन को देखने का विधान नहीं है। यह तो अनुष्ठानिक कार्यक्त्रम हैं। यह जब भी होगा, दयालु माता दौड़ी चली आती हैं। वाहन पर ध्यान सामूहिक पूजा-पंडालों पर ही लागू होता है। ।। सप्तम्यो प्रात:-आनीया गृहमध्ये परपूजयेत, पूजा पंडाले  देवी स्थापना औदयिक सप्तम्यां देवी आगमनं।। इस श्लोक के अनुसार पंडालों में जो माता की प्रतिमा स्थापित की जाती हैं और वहाँ पूजा-आवाहन किया जाता है, वहीं आने के लिए मातारानी ) वाहन का प्रयोग करती हैं।

अश्व वाहन होगा
सप्तमी मंगलवार को है। अत: मां दुर्गा अश्व (तुरंग) पर बैठकर आएंगी। अश्व युद्ध में प्रयोग होता है। इसलिए अश्व पर बैठकर आने का मतलब युद्ध की संभावना को जन्म देता है। सामाजिक एवं राष्ट्रीय स्तर पर युद्ध के बादल मंडराते रहेंगे। सप्तमी से वाहन की मान्यता शास्त्रीय भी है और बंगाल में इस पर ज्यादा मान्यता दी जाती है।

प्रथम दिन के हिसाब से
लोकाचार के हिसाब से प्रथम दिन के वाहन पर भी ध्यान देने की परंपरा का निर्वाह किया जाता है। इस हिसाब से माता रत्नजड़ित नौका से आएंगी। नौका जल में संचालित होता है ऐसे में इस बार जल से जुड़े होने के कारण वर्षा की अधिकता का आंकलन किया जा रहा है।

प्रस्थान ऐरावत हाथी से
माता का प्रस्थान 18 अक्तूबर गुरुवार को होगा । इस दिन के हिसाब से माता ऐरावत हाथी पर विदा होंगी जो शुभता का सूचक है। क्योंकि हाथी सनातन संस्कृति में शुभ माना जाता है। इसकी पूजा देवों में प्रथम पृज्य गणेश के रूप में होती है।

आध्यात्मिक साहित्यकार सलिल पांडेय ने बताया कि माता को प्रसन्न करने के लिए यद्यपि 'निर्मल मन' ही पर्याप्त है। लेकिन शास्त्रों के हिसाब से षोड्षोपचार पूजन भी करना चाहिए। माता को अलग-अलग दिनों मेंअलग -अलग वस्तुओं को समर्पित करने का भी विधान है। लेकिन पूजा के निमित्त सिंदूर, लौंग-इलायची, सुपारी, देशी गाय का घी जरूर खरीदकर प्रतिदिन इसे चढ़ाना चाहिए। प्रसाद के रूप में चढ़ाने के बाद इसका प्रयोग करना चाहिए। इसी घी से दीपक तथा हवन भी करना चाहिए ।

मातारानी को अलग-अलग दिनों में क्या चढ़ाएं 
प्रतिपदा यानी प्रथम दिन चंदन का तेल, त्रिफला, कंघी। द्वितीया को रेशमी वस्त्र। तृतीया को दर्पण,आलता व सिंदूर। चतुर्थी को दही, घी, मधु, चांदी की कोई वस्तु,काजल। पंचमी को आभूषण। षष्ठी को बिल्वपत्र। सप्तमी को पुस्तक अंतिम दिन तक देवी के समीप रखकर ज्ञान की कामना।  अष्टमी को मानसिक विकारों को खत्म करने का भाव भेंट करना चाहिए। नवमी को छत्र भेंट कर 2 से 10 वर्ष की कन्या का पूजन करें।

नौ दिन क्या भोग लगाएं 
प्रतिपदा यानी पहले दिन रोग मुक्ति के लिए देशी गाय का घी। द्वितीया को दीर्घायु के लिए चीनी। तृतीया को दु:खों से मुक्ति के लिए दूध। चतुर्थी को विपत्तियों से छुटकारे के लिए मॉलपुआ। पंचमी को बौद्धिक विकास के लिए केला । षष्ठी को सौंदर्य के लिए मधु। सप्तमी को शोकनाश के लिए गुड़। अष्टमी को संताप दूर के लिए नारियल। नवमी को सर्व विधि लाभ के लिए धान का लावा का भोग लगाएं ।

कैसे मातारानी दौड़ते आएंगी
'सर्व सौख्यकरीं देवी' के अनुसार पूजा का संकल्प लेते समय घर-परिवार के छोटे से छोटे बच्चे, भांजी-भांजे, भाई, बहन, माता-पिता, चाचा-चाची, घर के हर सदस्यों, अपने मित्रों, शुभचिंतकों, अपने वरिष्ठजनों, जिनसे आजीविका चलती है, उनके व अपने नियोक्ता, अपने यहां काम करने वाले श्रमिकों के उत्थान की कामना का भाव लाते ही देवी दौड़ी चली आती हैं। एकांगी पूजा में देवी नहीं आती हैं।

शारदीय नवरात्र में पाठ....
मां के नौ माह गर्भ में रहने के एवज में मां को मिले कष्ट के प्रति आभार व्यक्त करें । हर दिन व्रत न रहें तो कुछ चीजों से इस अवधि में परहेज जरूर करें, ताकि जीवन में परहेज की आदत बने।  वर्ष के प्रथम नवरात्र चैत्र में भगवान राम का जन्म होता है इसलिए इस नवरात्र में तो रामचरित मानस का पाठ किया जाता है। लेकिन शारदीय नवरात्र में चित्तवृत्ति और प्रवृत्ति की उच्चता के लिए श्रीदुर्गा सप्तशती का पाठ किया जाए। पाठ न हो पाने पर मां की कोई भी स्तुति करें क्योंकि मां सिर्फ स्तुति से रीझ जाती है। मां के लिए आदर के दो शब्द काफी होते हैं।

जिस प्रकार हर व्यक्ति की मां अपनी संतान से भौतिक वस्तु की चाहत नहीं बल्कि अपनत्व एवं सहज व सरल व्यवहार की अपेक्षा रखती है। ठीक उसी प्रकार नवरात्र में पूजित होने वाली नौ देवियां भी अपने उपासकों से यही अपेक्षा रखती हैं। मन को शक्तिशाली बनाने के लिए सात्विक पूजा की जानी चाहिए। इसी से मां सबसे ज्यादा प्रशन्न होती है। इस बार मां दुर्गा का आगमन नाव से हो रहा है और हाथी पर मां की विदाई होगी। भागलपुर के लोग दुर्गा पूजा की तैयारी में जुट गये हैं। शहर में मंदिरों व पूजा पंडालों के अलावा अधिकांश घरों में भी कलश स्थापित किया जाता है। 

पूजा के लिए अति शुभ मुहुर्त दिन के 11.36 से 12.24 बजे तक है।

कलश स्थापना के लिए सामग्री
लाल रंग का आसन्न, मिट्टी का पात्र, जौ, कलश के नीचे रखने के लिए मिट्टी, कलश, मौली, लौंग, इलायची, कपूर, रोली, साबुत सुपारी, चावल, अशोक या आम के पांच पत्ते, नारियल, सिंदूर, फल-फूल, माता का शृंगार और फूलों की माला।

कैसे करें कलश की स्थापना
पंडित भूपेश मिश्रा ने बताया कि कलश स्थापित करने से पहले शुद्ध भूमि पर मिट्टी रखकर पहले पूजा करें। मिट्टी पूजन के बाद जौ डालें फिर कलश स्थापित करें। कलश पर स्वस्तिक बनाकर कलश में मौली लपेट दें। फिर कलश में जल, द्रव्य, पंचामृत, सर्वा औषधी, सप्तमृतिका, दुर्बा, सुपारी, पल्लव लगाकर पात्र में रख दें। फिर नारियल को लाल कपड़ा से लपेट कर बैठा दें। फिर मनो जुती मंत्र से प्रतिष्ठा करें।

रायपुर /श्री ललित नारायण मिश्र जी की जयंती समारोह,जमशेदपुर, झारखंड में गत 10 मार्च 2018 को आयोजित हुआ इस दौरान विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई आयोजन के   मुख्य अतिथिस्व मिश्र के  पुत्र श्री विजय कुमार मिश्र जी(सदस्य-विधान परिषद,बिहार)एवं गोविंदपुर,जमशेदपुर विधायक श्री रविन्द्र साही जी,संस्था के अध्यक्ष श्री परमानंद झा जी सहित अनेक गणमान्य जनों द्वारा मैथिल समाज छत्तीसगढ़ के मैथिल प्रवाहिका के सम्पादक मनीष कुमार झा को सम्मानित किया गया ,इस दौरान अनेक प्रबुध्द जन मौजूद रहे  

पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास की पूर्णिमा पर होली  मनाई जाती है। इस साल 1 मार्च को सुबह 8 बजकर 57 मिनट से पूर्णिमा तिथि लग रही है लेकिन इसके साथ भद्रा भी लगा रहा है। भद्रा काल में होलिका दहन करने से अनिष्ट होने का भय रहता है। इसलिए इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए। शाम में 7 बजकर 40 मिनट पर भद्रा समाप्त हो जाएगा इसके बाद से होलिका दहन किया जाना शुभ रहेगा।

ज्योतिष के मुताबिक होलाष्टक में सभी तरह के शुभ काम करना वर्जित रहता है। इस दौरान किए गए शुभ काम सफल नहीं हो पाते हैं और परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

शारीरिक संबंध

इस दिन शारीरिक संबंध बनाने से बचना चाहिए। होलाष्टक के दिन संबंध बनाने से पैदा होने वाली संतान को जिंदगीभर तकलीफों से गुजरना पड़ता है।

वाद-विवाद
घर में वाद-विवाद न पैदा करें वरना होली पर की गई पूजा से आपको कृपा नहीं मिलेगी। साथ ही मां लक्ष्मी अप्रसन्न हो जाएगी।

लेट तक सोना
इस दिन सुबह जल्दी उठ जाना चाहिए और नहा कर सूर्य को जल चढ़ाना चाहिए। देर तक नहीं सोना चाहिए। अगर इस बात का ध्यान नहीं रखा तो आलस्य बढ़ेगा और इससे भगवान की कृपा नहीं मिल पाएगी।

 

नई दिल्ली (27 जनवरी): 26 जनवरी के दिन शन‌ि देव दूसरी राशि में जाकर बैठ रहेहै। ऐसा माना जा रहा है कि वे सबसे पहले धनु राशि में प्रवेश करेंगे। उसके बाद सिलसिला शरू होगा अन्य राशियों में प्रवेश का इसमें कुछ राशियां प्रमुख होंगी। जैसे- धनु, मकर राश‌ि में साढ़ेसाती का आरंभ होगी और वृष एवं कन्या राश‌ि के जातक ढ़ैय्या के दौर से गुजरेंगे। ज्योतिष की मानें, तो शन‌ि जब अशुभ प्रभाव देते हैं, तब एक के बाद एक परेशानी आती रहती है और व्यक्ति को दीमक की तरह खोकला करने लगती है।

 

शन‌ि की साढ़ेसाती और ढैय्या से परेशान व्यक्ति की चप्पल अथवा जूते अचानक से टूट जाते हैं या खो जाते हैं। तामस‌‌िक चीजों की तरफ झुकाव बढ़ने लगता है जैसे मांस-मद‌िरा के सेवन की चाह बढ़ने लग जाती है। जो लोग इन चीजों को पसंद नहीं करते, वो भी इस ओर आकर्षित होने लगते हैं।

 

जब घर-परिवार पर शनि भारी होने लगते हैं तो घर का कोई ह‌िस्सा टूट कर ग‌िर जाता है अथवा दीवारों में दरारें आने लगती हैं। घर में चोरी हो जाती है या चीजें गुम हो जाती हैं।

 

कारोबार में घाटा और व्यवसाय में आचानक से धन हानि होने लगती है। पैरों के रोग या हड्ड‌ियों से संबंधित बीमारियां घेरे रहती हैं। इसके अलावा बनते हुए काम बिगड़ जाना, हर काम में नुकसान पहुंचना, जीवन के हर क्षेत्र में असफलता मिलना या अनिष्ट होना।

 

 शनि की साढ़ेसाती व ढैया लगना, यह तभी फलीभूत होते हैं जब शनि की महादशा या अंतर्दशा चल रही हो अथवा जब शनि कुण्डली में खराब भावों का सूचक हो। अगर यह अशुभ नहीं है या दशा नहीं चल रही हो तो शनि व्यक्ति को हानि नहीं देता है। शनि का कार्य मात्र अनुचित व पाप कर्म का फल अपनी दशा व गोचर के दौरान देना है।

 

 

नई दिल्ली (16 दिसंबर): माता वैष्णोदेवी श्राइन बोर्ड आज से श्रद्धालुओं के लिए मां वैष्णोदेवी की प्राचीन गुफा के कपाट खोलने जा रहा है।

 

 

लंबे समय से इंतजार कर रहे श्रद्धालुओं के लिए सोमवार सुबह से माता वैष्णो देवी की प्राकृतिक गुफा के द्वार खोल दिया गए। इसके साथ ही रात को भी भक्त पुरानी गुफा के दर्शन कर सकेंगे।

 

 

प्राकृतिक गुफा हर साल मकर संक्रांति के आसपास खोली जाती है जब श्रद्धालुओं के संख्या अपने सबसे निचले स्तर पर होती है। भीड़ कम होने के चलते प्राकृतिक गुफा को खोल दिया जाता है।

 

 

 प्राकृतिक गुफा को मार्च के पहले सप्ताह में बंद कर दिया जाएगा। प्राकृतिक गुफा की क्षमता 400 श्रद्धालु प्रति घंटे है। प्राकृतिक गुफा का संचालन परिस्थितियों के आधार पर किया जाता है।

 

अगर किसी कारणवश इस आंकड़े में बढ़ोत्तरी होती है तो प्राकृतिक गुफा को श्रद्धालुओं के लिए आस्थायी रुप से बंद कर कर दिया जाता है। इसके बाद श्रद्धालुओं के लिए कृत्रिम गुफा को फिर से खोल दिया जाता है। प्राचीन गुफा के द्वार सुबह 10 बजे से लेकर शाम 4 बजे तक श्रद्धालुओं के लिए खुले रहेंगे।

 

नई दिल्ली: साल 2017 इस राशि वालों के लिए उम्मीदों से भरा होगा। इस वर्ष शनि की ढय्या का अल्पकालिक प्रभाव इस राशि पर रहेगा। रूका हुआ पैसा भी इस साल मिल सकता है।

 

 

 आज हम आपको बता रहें शनि ग्रह के अनुसार, साल 2017 आपके लिए कैसा रहेगा। इस राशिफल के माध्यम से आप जान पाएंगे कि इस साल आपके साथ क्या अच्छा होगा या कब आपको परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। इस राशिफल के माध्यम से आप जान पाएंगे कि इस साल आपके साथ क्या अच्छा होगा या कब आपको परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

 

 जानिए साल 2017 में शनिदेव किस प्रकार आपकी राशि को प्रभावित करेंगे-

 

 1. मेष राशि-

 यह पूरा साल मेष राशि वालों के लिए काफी उठा-पटक व अस्थिरता वाला रहेगा। स्वास्थ्य तो ठीक रहेगा, लेकिन नौकरी व बिजनेस में आपको इस साल बहुत मेहनत करनी पड़ेगी। परिवार के लोग व दोस्त हर मुश्किल में आपके साथ रहेंगे। बिजनेस में कुछ गलत निर्णय ले सकते हैं, जिसके कारण धन हानि के योग बन सकते हैं। मेहनत के बाद भी संतोषजनक परिणाम नहीं मिल पाएंगे।

 

 2. वृषभ राशि-

 इस साल शारीरिक समस्याएं जैसे- पेट दर्द, सिर दर्द, शुगर व हार्ट से संबंधित बीमारियां बार-बार परेशान करेंगी। बनते हुए काम में बार-बार रूकावटें आएंगी। बिजनेस में भी हालात ठीक नहीं रहेंगे। आप अगर अपना काम बढ़ाने की सोच रहें हैं तो ये समय ठीक नहीं है। 21 जून से 26 अक्टूबर के बीच कोई बड़ी दुर्घटना घट सकती है। पैसों को लेकर किसी अजनबी पर बिल्कुल भी भरोसा न करें।

 

 3. मिथुन राशि-

 साल 2017 में शनिदेव आपकी राशि से छठे व सातवे स्थान पर रहेंगे। शनि की यह गति आपके लिए फायदेमंद रहेगी। धन प्राप्ति के योग बनेंगे। खर्च भी ज्यादा होगा। घर-परिवार में सुख-शांति का माहौल रहेगा। परिवार व मित्रों से पूरा-पूरा सहयोग मिलेगा। पति-पत्नी के बीच तनाव हो सकता है। इस साल परिवार में कोई मांगलिक आयोजन हो सकता है। वाहन, भूमि आदि की खरीदी के योग भी इस साल बन रहे हैं।

 

 4. कर्क राशि-

 26 जनवरी से धनु राशि में प्रवेश करते ही इस राशि के लिए शनि छठे भाव में रहेगा। शनि की यह स्थिति मध्यम फल देने वाली रहेगी। शनि के कारण जहां आर्थिक पक्ष मजबूत होगा, वहीं संतान व परिवार की ओर से परेशानी हो सकती है। बिजनेस बढ़ाने की योजना पर काम होगा। पुराना रूका हुआ धन भी इस साल आपको मिल सकता है। हेल्थ में इस साल थोड़ा सुधार रहेगा, पति-पत्नी में थोड़ी अनबन रह सकती है। प्रेम संबंधों में सावधानी रखें तो बेहतर रहेगा।

 

 5. सिंह राशि-साल 2017 इस राशि वालों के लिए उम्मीदों से भरा होगा। इस वर्ष शनि की ढय्या का अल्पकालिक प्रभाव इस राशि पर रहेगा। स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। पुराने रोगों से मुक्ति मिलेगी। अगर कोई पारिवारिक विवाद चला रहा है तो उसका निपटारा भी इस साल हो सकता है। इस साल अचल संपत्ति जैसे- मकान, प्लॉट या फ्लैट खरीदने के योग बन रहे हैं। रुपयों के लेन-देन में किसी पर भरोसा न करें तो बेहतर रहेगा। पुराना रूका हुआ पैसा भी इस साल मिल सकता है।

 

 6. कन्या राशि-

 इस राशि वालों के लिए साल 2017 चुनौतियों से भरा रहेगा। छोटे-छोटे कामों को पूरा करने के लिए भी पूरी कोशिश करनी पड़ेगी। इस साल बिजनेस, नौकरी व निजी जीवन सभी क्षेत्रों में आपको परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। साल 2017 में इस राशि पर अंशकालिक ढय्या का प्रभाव रहेगा वाहन सावधानी से चलाएं। बिजनेस के लिए किसी से उधार लेना पड़ सकता है।

 

 7. तुला राशि-

 साल 2017 की शुरूआत में तुला राशि पर शनि की साढ़ेसाती का अंतिम चरण रहेगा। 26 जनवरी से 21 जून के बीच यह साढ़ेसाती उतर भी जाएगी। यह साल इस राशि वालों के लिए मिश्रित फल देने वाला रहेगा। इस साल स्वास्थ्य तो ठीक रहेगा, लेकिन पैसों को लेकर काफी उठा-पटक करनी पड़ सकती है। लाइफ पार्टनर का पूरा सहयोग मिलेगा। बिजनेस में पार्टनर व कर्मचारियों पर पूरी नजर रखें। जितना पैसा आएगा, उतना खर्च हो जाएगा।

 

 8. वृश्चिक राशि-

साल 2017 में पूरे समय इस राशि पर शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव रहेगा। 26 जनवरी तक शनि आपकी राशि में रहेंगे, इसके बाद दूसरे स्थान पर रहकर फल देंगे। यह साल आपके लिए कुछ खास नहीं रहेगा। हेल्थ प्रॉब्लम्स के कारण बिजनेस पर भी फोकस नहीं कर पाएंगे, इससे नुकसान होने की संभावना है। अगर आप नौकरीपेशा हैं तो किसी लापरवाही के कारण बॉस की डांट-फटकार सुनने को मिल सकती है। यात्रा पर खर्च होने के योग बन रहे हैं। अजनबी पर भरोसा न करें।

 

 9. धनु राशि-

 इस राशि पर पूरे साल शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव रहेगा, जिसके कारण इन्हें अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। हेल्थ को लेकर समस्याएं तो रहेंगी साथ ही बिजनेस में भी नुकसान उठाना पड़ सकता है। निजी व बिजनेस के टारगेट पूरे नहीं होंगे। परिवार के लोग हर मुश्किल समय में आपका साथ देंगे। पैसों की तंगी पूरे साल बनी रहेगी प्रेम संबंधों के कारण आप अपने लक्ष्यों से भटक सकते हैं।

 

 10. मकर राशि-

 साल 2017 में इस राशि पर अंशकालिक रूप से शनि की ढय्या का प्रभाव रहेगा। व्यर्थ की यात्राओं पर जाना पड़ सकता है। शनि के प्रभाव से साल भर स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बनी रहेंगी। आपकी योग्यता से सफलता मिलेगी। परिवार वालों व दोस्तों का पूरा-पूरा साथ मिलेगा। नया घर खरीदने का मन बन सकता है। आपके दुश्मन आपको नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर सकते हैं, संभलकर रहें पेट से संबंधित रोग होने की संभावना है।

 

11. कुंभ राशि-

इस राशि वालों के लिए साल 2017 बहुत ही शानदार रहेगा। हेल्थ प्रॉब्लम्स खत्म होंगी, साथ ही आर्थिक स्थिति पहले से बेहतर बनेगी। पुरानी समस्याओं का निदान इस साल होने के योग बन रहे हैं। इस दौरान बिजनेस में भी सावधानी रखें। शनि के वक्र काल में नौकरीपेशा लोग संभलकर काम करें पुराने विवाद इस साल समाप्त हो सकते हैं। प्रतियोगियों को पीछे छोड़ देंगे। परिवार में कोई शुभ प्रसंग आ सकता है

 

 12. मीन राशि-

 साल 2017 में शनि आपकी राशि से नौवे व दसवे स्थान पर रहेंगे। शनि की यह स्थिति आपके करियर के लिए अच्छी साबित होगी। इनकम ऑफ सोर्स इस साल बढ़ सकते हैं। नौकरी में बॉस आपके काम से खुश रहेंगे, प्रमोशन भी मिल सकता है। अजनबी लोगों पर भरोसा न करें। कोई अपना ही आपको धोखा दे सकता है।

 

ज्योतिष शास्त्र में शनिदेव को न्याय का देवता माना गया है क्योंकि मनुष्यों को उनके अच्छे-बुरे कर्मों का दंड शनिदेव ही देते हैं। इसलिये अच्छे परिणामों के लिये शनिदेव की उपासना करे।

 

 

देवभूमि में ईश्वर रहते हैं। अमूमन यह बात हम सभी जानते हैं। लेकिन देवभूमि में ये देवी-देवता कहां रहते हैं? कोई नहीं जानता। लेकिन पाताल भुवनेश्वर गुफा एक ऐसा स्थान है जहां 33 कोटि देवी देवता रहते हैं।

पाताल भुवनेश्वर का गुफा मंदिर' उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल के प्रसिद्ध नगर अल्मोड़ा से शेराघाट होते हुए जाते हैं। यह स्थान अल्मोड़ा से करीब 160 किलोमीटर की दूरी तय कर पहाड़ी वादियों के बीच बसे सीमान्त कस्बे गंगोलीहाट में स्थित है।

लोगों की आस्था का प्रमाण है यहां साक्षात् देखा भी जा सकता है। दरअसल, पाताल भुवनेश्वर की गुफा का उल्लेख स्कंद पुराण में भी मिलता है। यह गुफा विशालकाय पहाड़ी में 30 फुट अंदर है। मान्यता है कि इस गुफा की खोज आदि शंकराचार्य ने की थी।

 

गुफा के अंदर आखिर क्या है?

स्कन्द पुराण के मानस खण्ड 103 अध्याय के 155 वें श्लोक में वर्णित है कि गुफा में पारिजात व कल्पतरू वृक्ष, गणेशजी के सिरविहीन चित्र और शैल चित्र मौजूद हैं। 108 पंखुडिय़ों वाला ब्रह्मकमल, शिव की तपस्या के कमंडल, गुफा की छत से गाय की एक थन की आकृति भी है। वैसे गुफा का प्रवेश द्वार इतना छोटा है कि पहली नजर में देखने पर ही डर लगता है, लेकिन जंजीर के सहारे गुफा के अंदर जाया जा सकता है।

मान्यता है कि पितृ पक्ष से संबंधित श्राद्ध कर्म बद्रीनाथ धाम में, मातृ पक्ष से सम्बन्धित श्राद्ध कर्म पवित्र गया धाम में भातृ पक्ष वाले कर्म पुष्कर में और ननिहाल पक्ष वाले श्री रघुनाथ मंदिर धाम में करना श्रेष्ठकर है।

लेकिन पाताल भुवनेश्वर गुफा में सभी पक्षों से संबंधित श्राद्ध कर्म तथा तर्पण आदि किया जाना संभव है। धार्मिक ग्रंथों में वर्णित यह बात स्वयं ब्रह्मा जी ने कही है।

 

 

फोटो गैलरी

Contact Us

  • Address: Pramod Babu Jha C/O Yuvraj Singh, D32/A, Gangotree Nagar, Dandi Naini, Allahabad, 212103
  • Tel: +(011) 9452377524, 8707786570
  • Email:  This email address is being protected from spambots. You need JavaScript enabled to view it.
  • Website: http://www.smartindianews.in

About Us

Smart India News is one of the renowned Hindi Magazine in print and web media. It has earned appreciation from various eminent media personalities and readers. ‘Smart India News’ is founded by Mr Pramod Babu Jha.